नई दिल्ली: भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) के स्पोर्ट्स साइंस डिविजन द्वारा भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के सहयोग से यहां इंदिरा गांधी स्टेडियम हाइब्रिड मोड में गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (जीसीपी) पर एक दिवसीय कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला में खेल और क्लिनिकल/खेल विज्ञान अनुसंधान से जुड़े शोधकर्ताओं, सपोर्ट स्टाफ और प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाया गया ताकि मानव अध्ययन को नियंत्रित करने वाले नैतिक और नियामक ढांचों के बारे में उनकी समझ को बढ़ाया जा सके।
आईसीएमआर के विशेषज्ञों के नेतृत्व में आयोजित वैज्ञानिक सत्रों में आईसीएच-जीसीपी (ई6) सिद्धांत, आईसीएमआर नैतिक दिशानिर्देश, एनडीसीटीआर 2019 के प्रावधान, जांचकर्ताओं और संस्थागत नैतिकता समितियों (आईईसी) की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां और गंभीर प्रतिकूल घटनाओं (एसएई) का प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को शामिल किया गया।
गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए आईसीएमआर की वैज्ञानिक-ई डॉ. स्तुति भार्गवा ने कहा, ” गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस (जीसीपी) मानव विषयों पर आधारित नैदानिक परीक्षणों के डिजाइन, संचालन, रिकॉर्डिंग और रिपोर्टिंग के लिए एक अंतरराष्ट्रीय नैतिक और वैज्ञानिक गुणवत्ता मानक है। यह प्रतिभागियों के अधिकारों, सुरक्षा और कल्याण की रक्षा सुनिश्चित करता है, साथ ही परीक्षण डेटा की विश्वसनीयता और अखंडता की गारंटी भी देता है।”
SAI के स्पोर्ट्स साइंस डिविजन के कार्यकारी निदेशक ब्रिगेडियर (डॉ.) बिभु कल्याण नायक ने कहा, ” जैसे-जैसे खेल विज्ञान अनुसंधान में उन्नत हस्तक्षेप और एथलीट-केंद्रित अध्ययन शामिल होते जा रहे हैं, गुड क्लिनिकल प्रैक्टिस का पालन करना केवल एक नियामकीय आवश्यकता नहीं बल्कि एक नैतिक जिम्मेदारी है।”


















