ओलंपिक में भारतीय महिलाएं: आधी सदी के जुनून से मिली कामयाबी

ओलंपिक में भारतीय महिलाएं: India’s Women Olympic Journey

भारत की ओलंपिक विरासत में महिलाओं की भूमिका भी बेहद अहम रही है। महिला खिलाड़ियों ने ओलंपिक जैसे खेल के वैश्विक मंच पर देश के लिए मेडल जीतकर अमिट छाप छोड़ी है। स्वतंत्र भारत में ओलंपिक की ऐतिहासिक यात्रा की शुरुआत 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में हुई थी, जब चार भारतीय महिला खिलाड़ियों, नीलिमा घोष और मैरी डिसूजा, डॉली नाज़िर और आरती साहा ने देश का प्रतिनिधित्व किया। इनमें नीलिमा घोष ऐसी पहली महिला खिलाड़ी बनीं, जो ओलंपिक में भारत की ओर से एथलेटिक्स के मैदान में कदम रखा। इसके साथ ही मात्र 17 साल की उम्र में नीलिमा घोष ने स्वतंत्र भारत की पहली ओलंपिक महिला एथलीट बनने का गौरव हासिल कर लिया। नीलिमा ने 100 मीटर दौड़ 13.60 सेकेंड में पूरी करते हुए पांचवें स्थान पर रहीं, जिससे क्वार्टर फाइनल में जगह नहीं बना सकीं।

हालांकि, इससे पहले ओलंपिक शुरू होने के 28 साल बाद 1924 के पेरिस ओलंपिक में नोरा पॉली ने भारत का प्रतिनिधित्व किया था। नोरा पॉली ने 1924 के पेरिस ओलंपिक में टेनिस खेला और भारत की ओर से ओलंपिक में हिस्सा लेने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनीं। नोरा पॉली का जन्म साल 1894 में ब्रिटिश राज के दौरान भारत में नोरा मार्गरेट फिशर के रूप में हुआ था। उनके बचपन का अधिकांश समय ब्रिटेन में अपने दो भाई-बहनों के साथ बीता। साल 1911 में इंग्लैंड के ईस्टबॉर्न के बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई पूरी की। साल 1915 में ब्रिटिश सैनिक से शादी के बाद नोरा 1921 में अपने जन्मस्थान भारत लौट आईं। इसके तीन साल बाद, एंग्लो-इंडियन टेनिस खिलाड़ी नोरा पॉली ने 1924 के पेरिस समर ओलंपिक में हिस्सा लेकर भारत की ओर से ओलंपिक में भाग लेने वाली पहली महिला खिलाड़ी बनी। नोरा पॉली की इस उपलब्धि ने भारतीय महिलाओं के लिए ओलंपिक का रास्ता खोल दिया था।

इसके बाद 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक, 1932 के लॉस एंजिल्स ओलंपकि और 1936 के बर्लिन ओलंपिक में भारत की ओर से कोई भी महिला खिलाड़ी शामिल नहीं हुई। इसका एक कारण और भी था। साल 1928 से लेकर 1968 तक ओलंपिक से टेनिस को हटा दिया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद 1948 के लंदन ओलंपिक में भारत एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में पहली बार शामिल हुआ, लेकिन उस समय 79 सदस्यीय दल में सभी पुरुष खिलाड़ी शामिल थे। इसके चार साल बाद 1952 के हेलसिंकी ओलंपिक में चार महिला खिलाड़ियों को भारत का प्रतिनिधित्व करने का मौका मिला।

पिछले कुछ दशकों में ओलंपिक्स में भारत की महिला खिलाड़ियों ने काफी सफलता हासिल की है। करीब पांच दशक के अंतराल के बाद भारत की महिला खिलाड़ी ओलंपिक में अपनी अमिट छाप छोड़ने में उस समय कामयाब हुई, जब साल 2000 के सिडनी ओलंपिक में महिलाओं के 54 किलोग्राम वर्ग में कर्णम मल्लेश्वरी ने वेटलिफ्टिंग में भारत के लिए पहला ब्रॉन्ज मेडल जीता। इसके बाद भारतीय महिला एथलीटों ने ओलंपिक में देश के लिए अहम योगदान देते हुए अब तक 9 मेडल जीत चुकी हैं।
भारतीय बैडमिंटन स्टार पीवी सिंधु अकेली भारतीय महिला हैं, जिन्होंने 2016 के रियो ओलंपिक्स में महिला सिंगल्स में सिल्वर मेडल और टोक्यो 2020 में ब्रॉन्ज़ मेडल जीत चुकी हैं। मनु भाकर ने भी दो मेडल जीते हैं। लेकिन, उनका दूसरा मेडल मिक्स्ड टीम इवेंट में था।

भारतीय महिला ओलंपिक मेडल विजेता:-

एथलीटमेडलस्पोर्ट्स (इवेंट)ओलंपिक
कर्णम मल्लेश्वरीब्रॉन्ज़वेटलिफ्टिंग (महिलाओं का 54kg)सिडनी 2000
साइना नेहवालब्रॉन्ज़बैडमिंटन (महिला सिंगल्स)लंदन 2012
मैरी कॉमब्रॉन्ज़बॉक्सिंग (महिला फ्लाईवेट)लंदन 2012
पीवी सिंधुसिल्वरबैडमिंटन (महिला सिंगल्स)रियो 2016
साक्षी मलिकब्रॉन्ज़रेसलिंग (महिलाओं का 58kg)रियो 2016
मीराबाई चानूसिल्वरवेटलिफ्टिंग (महिलाओं का 49kg)टोक्यो 2020
लवलीना बोरगोहेनब्रॉन्ज़बॉक्सिंग (महिला वेल्टरवेट)टोक्यो 2020
पीवी सिंधुब्रॉन्ज़बैडमिंटन (महिला सिंगल्स)टोक्यो 2020
मनु भाकरब्रॉन्ज़शूटिंग (महिला 10m एयर पिस्टलपेरिस 2024

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