नई दिल्ली: भारतीय ग्रैंडमास्टर आर वैशाली FIDE महिला कैंडिडेट्स टूर्नामेंट का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गई हैं। वैशाली ने बुधवार को साइप्रस के पाफोस में आखिरी राउंड में कैटरीना लाग्नो को 48 चालों में मात देकर यह खिताब अपने नाम किया।
लंबे समय तक अपने छोटे भाई आर प्राज्ञानानंदा की सफलता के साए में खेलने वाली वैशाली ने इस जीत के साथ ही इस साल के अंत में होने वाले विश्व चैंपियनशिप मुकाबले में चीन की जू वेनजुन का सामना करने का टिकट हासिल कर लिया है। वह वर्ल्ड चैंपियनशिप मैच खेलने वाली दूसरी भारतीय महिला खिलाड़ी होंगी।
वैशाली ने कुल 8.5 अंक हासिल किए और कोनेरू हम्पी के नक्शेकदम पर चलते हुए ऐसी उपलब्धि हासिल की जो देश में महिला शतरंज के लगातार बढ़ते कद को दर्शाती है।
ओपन वर्ग में जावोखिर सिंदारोव ने चीन के वेई यी के साथ बाजी ड्रॉ खेली और 9.5 अंक के साथ शीर्ष पर रहते हुए मौजूदा विश्व चैंपियन भारत के डी गुकेश को चुनौती देने का अधिकार हासिल किया।
24 वर्षीय वैशाली की यह जीत इसलिए भी खास रही क्योंकि वैशाली ने टूर्नामेंट की शुरुआत कम रेटिंग वाले खिलाड़ियों में से एक के रूप में की थी, लेकिन शानदार प्रदर्शन से उन्होंने सभी को पीछे छोड़ दिया।
वैशाली ने अपने निर्णायक मुकाबले में बेहतरीन रणनीति अपनाई। शुरुआती चालों से ही उन्होंने बढ़त बना ली, जिसे उन्होंने पूरे मैच के दौरान बरकरार रखा। मिडिल गेम में सटीक चालें चलते हुए उन्होंने अपने प्यादे की बढ़त को जीत में बदल दिया।
हालांकि, खिताब जीतने के लिए उन्हें अन्य मुकाबलों के परिणाम पर भी निर्भर रहना पड़ा। भारत की ही खिलाड़ी दिव्या देशमुख ने कजाखस्तान की बिबिसारा अस्सौबायेवा के खिलाफ ड्रॉ खेला, जिससे वैशाली की जीत पक्की हो गई।
वैशाली की यह सफलता इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि एक समय वह इस टूर्नामेंट में भाग लेने को लेकर संशय में थीं। पिछले साल चेन्नई ग्रैंड मास्टर्स में खराब प्रदर्शन (सिर्फ 1.5 अंक) के बाद उन्होंने ग्रैंड स्विस में हिस्सा न लेने का भी विचार किया था।



















