भारत के ग्रामीण इलाकों से निकलकर खिलाड़ी अब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी धाक जमा रहे हैं। कुश्ती, फुटबॉल, कबड्डी और तीरंदाजी जैसे खेलों में, खासकर बेटियां, बाधाओं को तोड़कर बेहतर प्रदर्शन कर रही हैं। इन खिलाड़ियों को आर्थिक परेशानी भी लक्ष्य से नहीं डिगा सकी। संघर्ष के बीच कड़ी मेहनत के बल पर मेडल जीत कर अपने जिले और प्रदेश के साथ देश का नाम रोशन कर रहे हैं।
1. मानसी चामुंडा
मानसी चामुंडा ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई रिकॉर्ड तोड़े। उन्होंने 2025 एशियाई युवा और जूनियर भारोत्तोलन चैंपियनशिप में 166 किलोग्राम उठाकर कांस्य पदक जीता। KIYG 2025 में राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाए। उत्तर प्रदेश के बदायूं की मानसी के हौसले के आगे उनकी आर्थिक कमजोरी बाधा नहीं बनी। मानसी की मां मिठाई की दुकान चलाती हैं और पापा खेती-बाड़ी का काम करते हैं। राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए 50 हजार रुपये का ड्राफ्ट मांगा गया, लेकिन परिचित की मदद से वे भाग ले सकीं। मानसी 24 घंटे में अपने भोजन पर 350-450 रुपये तक खर्च करती हैं, जिसके लिए परिवार अपने खर्चे कम कर देता है।
2. अदिति स्वामी
विश्व तीरंदाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर अदिति स्वामी सबसे कम उम्र की विश्व चैंपियन बनीं। महाराष्ट्र के सतारा के पास शेरेवाड़ी गांव की अदिति के पिता ने उनका सपना पूरा करने के लिए ऋण लिया। 2018 में राष्ट्रीय पदार्पण में रजत पदक और 2021 में उप-जूनियर स्पर्धा में पहला निजी स्वर्ण जीता। एशिया कप फुकेत 2022 में अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और टीम को रजत दिलाने में अहम भूमिका निभाई। बर्लिन विश्व चैंपियनशिप में निजी स्वर्ण जीतकर इतिहास रचा और अब उनकी नजर 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक पर है।
3. शुभम कुमार
बिहार के आरा जिले के शुभम कुमार ने पहचान बनाने के लिए काफी संघर्ष किया। नेशनल आर्चरी कॉम्पिटिशन के लिए उन्होंने ट्रेन के जनरल डिब्बे में 30 घंटे का सफर किया। उनकी टीम ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। शुभम ने 41वें जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में पहले दिन गोल्ड जीता और अंडर-17 वर्ग में तीन पदक अपने नाम किए। 6वें खेलो इंडिया यूथ गेम्स में दो गोल्ड जीतकर अब उनकी नजर इंटरनेशनल मेडल पर है।
4. अभिनव शॉ
पश्चिम बंगाल के आसनसोल के छात्र अभिनव शॉ ‘सबसे कम उम्र के राज्य शूटिंग चैंपियन’ हैं। खेलो इंडिया यूथ गेम्स में सबसे कम उम्र के स्वर्ण पदक विजेता बनकर इतिहास रचा। उन्होंने महज 6 साल की उम्र में शूटिंग शुरू की। उनके पिता ने सेकंड-हैंड मार्केट से बंदूकें खरीदीं और जूते भी उधार लिए। 2018 नेशनल गेम्स में 10-मीटर एयर राइफल मिक्स्ड इवेंट में गोल्ड जीतकर लाइमलाइट में आए और बाद में खेलो इंडिया यूथ गेम्स में जीत दर्ज की।
5. प्रत्याशा रे
तैराकी में प्रत्याशा रे ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स 2025, गुवाहाटी में 4 स्वर्ण, 1 रजत और 1 कांस्य समेत कुल 5 पदक जीते। बचपन में गंभीर इन्फेक्शन के बाद जल चिकित्सा से उनका तैराकी सफर शुरू हुआ। धीरे-धीरे पानी ने उनके डर को खेल में बदल दिया। उत्कल यूनिवर्सिटी की छात्रा प्रत्याशा ने खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के चार एडिशन में कुल 18 मेडल जीते हैं।
6. दुती चंद
ओडिशा के जाजपुर जिले की दुती चंद गरीब बुनकर परिवार से आती हैं। 2012 में अंडर-18 नेशनल चैंपियनशिप में 100 मीटर दौड़ जीतकर नया रिकॉर्ड बनाया। 2013 एशियन एथलेटिक्स चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। हार्मोन टेस्ट विवाद के बाद 2015 में कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन फॉर स्पोर्ट्स से राहत मिली और 2016 एशियाई इंडोर चैंपियनशिप में राष्ट्रीय रिकॉर्ड के साथ कांस्य जीतकर शानदार वापसी की।
7. देविका सिहाग
देविका सिहाग ने थाईलैंड मास्टर्स सुपर 300 जीतकर इतिहास रचा और साइना व सिंधु के बाद तीसरी भारतीय महिला बनीं। हरियाणा के पंचकूला से निकलकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर परचम लहराया। बिना स्पोर्ट्स बैकग्राउंड के बावजूद एथलीट बनने का फैसला किया और उनकी मां रोज उन्हें बैडमिंटन क्लास ले जाती थीं।
8. साईराज परदेशी
18 वर्षीय वेटलिफ्टर साईराज परदेशी ने कॉमनवेल्थ वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025, अहमदाबाद में गोल्ड मेडल जीतकर कई रिकॉर्ड तोड़े। महाराष्ट्र के मनमाड के रहने वाले साईराज ने एशियन यूथ एंड जूनियर चैंपियनशिप में रिकॉर्ड 310 किलो वजन उठाकर गोल्ड जीता। कॉमनवेल्थ यूथ 2024 में भी उन्होंने जूनियर और सीनियर वर्ग में शानदार प्रदर्शन किया।
















