एथेंस ओलंपिक में महिलाओं को हिस्सा लेने की अनुमति नहीं थी। शादीशुदा महिलाओं को ओलंपिक देखने की भी इजाज़त नहीं थी। पकड़े जाने पर दंड दिए जाने की भी बातें कही जाती हैं। 1896 में ओलंपिक की शुरुआत के बाद महिलाओं के लिए हालात में कुछ सुधार हुआ।
आधुनिक ओलंपिक के जनक बैरोन पियरे डे कोबेर्टिन का मानना था कि महिलाओं को प्रतिस्पर्धा में शामिल करना अव्यावहारिक और गलत होगा। क्योंकि, 1896 में आयोजित एथेंस के पहले ओलंपिक खेलों में हिस्सा लेने वाले 14 देशों में से किसी भी देश में महिलाओं को वोट देने का भी अधिकार नहीं था।
हालांकि, 1900 के पेरिस ओलंपिक में महिलाओं को प्रतिस्पर्धा का अवसर देना एक क्रांति की शुरुआत थी। पेरिस ओलंपिक में शामि्ल 22 महिलाओं ने ना सिर्फ टेनिस, गोल्फ, नौकायन और घुड़सवारी जैसे खेलों में प्रतिस्पर्धा करने आई, बल्कि गोल्ड मेडल जीत कर इतिहास रच दिया। ये 22 महिलाएं केवल खिलाड़ी ही नहीं थीं, आधी आबादी की पथप्रदर्शक भी थीं। उनके अदम्य साहस ने ओलंपिक में एक ऐसा द्वार खोल दिया, जिसे बंद करना असंभव हो गया। इसके बाद महिलाओं के लिए धीरे-धीरे चीजें बेहतर होने लगीं।
1924 के पेरिस गेम्स में 2,954 पुरुष एथलीट और 135 महिला एथलीट शामिल हुए। इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी ने 1928 के एम्स्टर्डम गेम्स में महिलाओं के ट्रैक-एंड-फील्ड इवेंट्स को भी शामिल कर लिया। जिसमें जर्मनी की लीना रैडके विजेता रहीं। इसके बावजूद, महिलाओं की 800 मीटर की दौड़ का मुद्दा ऐसा बना कि दशकों तक मैदान के बाहर गूंजता रहा। लोगों के विरोध के कारण 1960 तक 800 मीटर की दौड़ को ओलंपिक में बैन कर दिया गया।
द्वितीय विश्व युद्ध के बाद जब तत्कालीन सोवियत संघ ने अंतरराष्ट्रीय खेल प्रतियोगिताओं में प्रवेश किया, तब विक्टोरियन युग की सोच खुलकर सामने आई। 1952 के हेलसिंकी गेम्स में सभी सोवियत पुरुष और महिला एथलीट ट्रेनिंग लेकर पूरी तैयारी के साथ आए थे। सोवियत महिलाओं की भागीदारी और सफलता संयुक्त राज्य अमेरिका को चुनौती देने लगी। अमेरिका के एथलीटों ने जहां 40 गोल्ड मेडल जीतकर तालिका में सबसे ऊपर थे, वहीं सोवियत संघ के एथलीट 21 गोल्ड मेडल जीत कर दूसरे स्थान पर काबिज हो गए।
1960 के रोम गेम्स में विल्मा रूडोल्फ के शानदार प्रदर्शन ने स्पष्ट संदेश दिया। अमेरिकी ट्रैक एंड फील्ड एथलीट विल्मा रूडोल्फ ने बचपन में पोलियो और लकवे जैसी गंभीर बीमारियों को मात देकर रोम ओलंपिक में तीन स्वर्ण पदक जीते।
लंदन में 2012 का ओलंपिक पहला ऐसा आयोजन था, जब बॉक्सिंग को शामिल किया गया। इसके साथ ही लंदन ओलंपिक में पहली बार ऐसा हुआ, जब महिलाओं ने सभी खेलों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। 2016 के रियो गेम्स में महिलाओं की भागीदारी बढ़ कर 45 फीसदी तक हो गई।
ओलंपिक में ये परिवर्तन सिर्फ मैदान तक सीमित नहीं रहा। इंटरनेशनल ओलंपिक कमिटी के कार्यकारी बोर्ड में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी। 2013 में जो संख्या 27 फीसदी थी, वे 2024 में बढ़कर 47 फीसदी तक हो गई। जो शासन के स्तर पर भी समानता को दर्शाता है।
आधुनिक ओलंपिक खेलों में लैंगिक असामनता के विरोध से लेकर समानता तक पहुंचने में 100 साल से अधिक लग गए। एथलीट के तौर पर ओलंपिक में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का नतीजा है कि 2028 के लॉस एंजिल्स में महिला प्रतिभागियों को पूरा सम्मान दिया गया। ऐसा पहली बार होगा, जब महिलाओं की संख्या पुरुष एथलीटों से अधिक होगी। पहली बार, कुल एथलीटों में महिलाओं खिलाड़ियों के लिए 5,333 और पुरुष खिलाड़ियों के लिए 5,167 सीटें रखी गई हैं।


















