Sawan Barwal Rewrites Marathon Record in Rotterdam

इस धावक ने करीब आधी सदी का रिकार्ड चकनाचूर कर दिया

आईपीएल के धूमधड़ाके और चकाचौंध ने मण्डी हिमाचल प्रदेश के जोगेन्दर नगर के एक छोटे से गांव के रहने वाले सावन बरवाल की चमक फीकी कर दी है। सवान ने पांच दिन पहले राटरडैम मैराथन में वह कारनामा कर दिया जो आईपीएल के एक सीजन में दस शतक लगाने वाले बल्लेबाज से भी बड़ा है।

सावन ने भले ही इस मैराथन में 20वें स्थान पर रहे पर उन्होंने जो समय दर्ज किया वह भारत के लिए ऐतिहासिक है। सावन ने 2 घंटा 11.58 सेकंड समय निकाला। उन्होंने 48 साल पहले यानी 1978 में शिवनाथ सिंह के राष्ट्रीय रिकार्ड 2 घंटा 12 सेकंड के कीर्तिमान ध्वस्त किया।

भारतीय एथलेटिक्स में कई एथलीटों के राष्ट्रीय रिकार्ड लम्बे अरसे तक चले। चाहे वह श्रीराम सिंह का 800 मीटर का रिकार्ड हो या मिल्खा सिंह का 400 मीटर का। पीटी ऊषा का 400 मीटर हर्डल का रहा हो या बहादुर प्रसाद का 1500 मीटर और 5000 मीटर का। पर ये सभी रिकार्ड धीरे-धीरे टूटते गए। सिर्फ शिवनाथ सिंह का ही मैराथन का राष्ट्रीय रिकार्ड करीब आधी सदी से बरकरार था।

बारवाल की उपलब्धि इसलिए भी अधिक सराहनीय है क्योंकि रॉटरडैम में आयोजित यह मैराथन उनकी पहली मैराथन थी। रविवार से पहले उन्होंने किसी भी आधिकारिक मैराथन में भाग नहीं लिया था। जनवरी में अमेरिका में आयोजित विश्व एथलेटिक्स क्रॉस कंट्री चैंपियनशिप में भाग लेने के बाद यह इस सीजन में उनकी दूसरी प्रतियोगिता थी।

हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के जोगिंदर नगर के एक गांव से ताल्लुक रखने वाले 28 वर्षीय बरवाल सेना में कार्यरत हैं। उन्होंने कई वर्षों तक कड़ी मेहनत से प्रशिक्षण लिया है और खुद को एक प्रतिष्ठित लंबी दूरी के धावक के रूप में स्थापित किया है। रविवार को उनका यह कारनामा उनकी कड़ी मेहनत का ही परिणाम था, क्योंकि वे सचमुच हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों से निकलकर रॉटरडैम की समतल सड़कों पर आ पहुंचे।

बरवाल ने 2024 में फेडरेशन कप में 5000 मीटर में स्वर्ण पदक जीतकर अपना पहला राष्ट्रीय खिताब जीता। लेकिन 2025 बरवाल के लिए सबसे सफल वर्ष रहा, क्योंकि उन्होंने उत्तराखंड में आयोजित राष्ट्रीय खेलों में 5000 मीटर और 10000 मीटर में स्वर्ण पदक, फेडरेशन कप में 10000 मीटर में स्वर्ण पदक और भुवनेश्वर में विश्व एथलेटिक्स कांस्य स्तरीय महाद्वीपीय टूर प्रतियोगिता में 5000 मीटर में कांस्य पदक जीता।

गोपाल ठाकुर द्वारा प्रशिक्षित बरवाल दिल्ली हाफ मैराथन और वर्ल्ड 25के कोलकाता रन में भी नियमित रूप से भाग लेते रहे हैं। उन्होंने 2024 में दिल्ली हाफ मैराथन में भारतीय एलीट धावकों में स्वर्ण पदक जीता था।

कौन थे शिवनाथ सिंह

सावन का प्रदर्शन निःसंदेह बेहतरीन, साहसिक और ऐतिहासिक है पर जिन दिनों में शिवनाथ सिंह ने राष्ट्रीय रिकार्ड बनाया था वह स्थितियां विषम और दुरूह थीं। हिन्दुस्तान एक से एक धुरंधर एथलीट दिए हैं। इनमें एक थे शिवनाथ सिंह। एथलेटिक्स में में जिनकों जरा सी भी रुचि होगी वह इस नाम से वाकिफ जरूर होगा। सत्तर के दशक में शिवनाथ सिंह जैसा लम्बी दूरी का एथलीट एशिया में नहीं था।

पहले ट्रैक पर पांच किलोमीटर और दस किलोमीटर की दौड़ में एशिया के सभी एथलीटों को पछाड़ा फिर मैराथन में जुट गए। वह देश के पहले ऐसे धावक थे जो मैराथन के मामले में दुनिया में जाने जाते थे। वह बात अलग है कि उनका मैराथन के क्षेत्र में दुनिया में सर्वश्रेष्ठ स्थान रहा। उन्होंने यह स्थान मांट्रियल ओलंपिक (1976) में हासिल किया था। समय निकाला था दो घंटा 16 मिनट 22 सेकेंड।

इस बेजोड़ धावक ने जालंधर में 1978 में हुई मैराथन दौड़ में कमाल का प्रदर्शन करते हुए 2 घंटा 12 मिनट का समय निकाला था। जिसे 12 अप्रैल 26 को सावन ने तोड़ा। 1974 के एशियाई खेल में उन्होंने पांच हजार मीटर की दौड़ में स्वर्ण पदक जीता।

बिहार के बक्सर जिले के रहने वाले शिवनाथ सिंह हमेशा नंगे पैर ही भागते थे। किट के नाम पर वह एक लोअर रखते थे। कच्ची सड़क, कीचड़ वाले खेत और बालू में दौड़-दौड़कर उन्होंने दमखम बनाया था। 1946 जन्मा यह एथलीट जून, 2003 को दुनिया के इस ट्रैक को छोड़कर चला गया।

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