नई दिल्ली: भारत की पुरुष और महिला टीमों ने पिछले महीने फरवरी में सऊदी अरब के रियाद में आयोजित एशियाई लैक्रोस खेलों में शानदार प्रदर्शन स्वर्ण पदक जीते हैं। भारत ने छह खिलाड़ियों वाले प्रारूप में पुरुष और महिला दोनों वर्ग में स्वर्ण पदक जीते।
भारत की पुरुष टीम ने फाइनल में इराक जबकि महिला टीम ने पाकिस्तान को हराया। इन दोनों टीमों में राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, गुजरात, तमिलनाडु, ओडिशा, असम, जम्मू और कश्मीर, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और उत्तर प्रदेश सहित देश के सभी हिस्सों के खिलाड़ी शामिल हैं।
भारतीय महिला लैक्रोस टीम ने 2024 में ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर डेब्यू किया था, जबकि पुरुषों की टीम ने 2025 में डेब्यू किया। लैक्रोस की 100 वर्ष से भी अधिक समय के बाद ओलंपिक में वापसी हो रही है और 2028 में लॉस एंजिलिस में होने वाले ओलंपिक खेलों में इसमें शामिल किया गया है। इस खेल को 1904 ओलंपिक में पहली बार शामिल किया गया था और फिर 1928, 1932 और 1948 में इसे प्रदर्शनी खेल के रूप में जगह मिली।
क्या होता है लैक्रोस खेल?
लैक्रोस खेल मूल रूप से अमेरिकी खेल है जिसमें जालीदार सिरे वाली लंबी छड़ी का उपयोग करके रबर की गेंद को पकड़ा जाता है, पास दिया जाता है और प्रतिद्वंद्वी के गोल में फेंका जाता है।
खेल मंत्री ने की खास अपील
केंद्रीय युवा मामले और खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने लैक्रोस गेम्स में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय पुरुष और महिला लैक्रोस टीमों से लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक के लिए क्वालिफिकेशन हासिल करने की अपील की है।
मांडविया ने बुधवार को एथलीटों से बातचीत करते हुए कहा, “लैक्रोस भारत के लिए एक उभरता हुआ बड़ा खेल है। यह आपका पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर था, और आप पहले ही प्रयास में पदक घर ला चुके हैं। अब फोकस और कड़ी मेहनत करने, ज्यादा एक्सपोजर पाने, और लॉस एंजिल्स 2028 में क्वालिफिकेशन कर देश को गर्व महसूस कराने का लक्ष्य होना चाहिए।”
—



















