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विभिन्न खेलों में भारत के टॉप-6 खिलाड़ी

विभिन्न खेलों में भारत के टॉप-6 खिलाड़ी

1. क्रिकेट:

(A) सचिन तेंदुलकर

‘क्रिकेट का भगवान’ कहे जाने वाले महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा रन और शतक बनाने का रिकॉर्ड है। भारत रत्न से सम्मानित सचिन के नाम 34,357 रन और 100 शतकों का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। मास्टर ब्लास्टर सचिन ने अपने 24 साल के क्रिकेट करियर (1989-2013) में 200 टेस्ट और 463 वनडे मैच खेले। वनडे में पहला दोहरा शतक लगाने का रिकॉर्ड भी तेंदुलकर के ही नाम है।

(B) एमएस धोनी

पूर्व विकेटकीपर-बल्लेबाज महेंद्र सिंह धोनी आईसीसी की सभी ट्रॉफियां (टी20 विश्व कप, वनडे विश्व कप, चैंपियंस ट्रॉफी) जीतने वाले एकमात्र कप्तान हैं। धोनी के नाम 50+ औसत के साथ वनडे में 10,000 से ज्यादा रन, विकेटकीपर के रूप में सर्वाधिक रन (नाबाद 183), अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में करीब 200 स्टंपिंग और अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा 332 मैचों में कप्तानी करने का रिकॉर्ड है। उनकी कप्तानी में चेन्नई सुपर किंग्स पांच बार आईपीएल चैंपियन बन चुकी है।

(C) विराट कोहली

रन मशीन विराट कोहली के नाम सबसे ज्यादा वनडे शतक लगाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। किंग कोहली के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में 85 शतक है,  जोकि महान सचिन तेंदुलकर के बाद दूसरे सबसे अधिक हैं। कोहली की कप्तानी में भारत ने 2008 में अंडर-19 विश्व कप का खिताब जीता था।

(D) रोहित शर्मा

‘हिटमैन’ के नाम से मशहूर पूर्व भारतीय कप्तान रोहित शर्मा के नाम वनडे में सबसे ज्यादा तीन दोहरे शतक लगाने का रिकॉर्ड है। वनडे में सर्वोच्च व्यक्तिगत स्कोर (नाबाद 264 रन) बनाने का रिकॉर्ड भी हिटमैन के ही नाम है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा छक्के (650+), और टी20I में 100+ छक्के लगाने का रिकॉर्ड भी उन्हीं के ही नाम है। अपनी कप्तानी में वो मुंबई इंडियंस को पांच आईपीएल खिताब जिता चुके हैं।

(E) मिताली राज

पूर्व भारतीय महिला कप्तान मिताली राज के नाम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज्यादा 10 हजार से ज्यादा रन है। उन्होंने वनडे में 7 शतक और 64 अर्धशतक जड़े जबकि टेस्ट में एक दोहरा शतक लगाया। वह 200 से ज्यादा वनडे मैच खेलने वाली एकमात्र महिला क्रिकेटर हैं।

(F) झूलन गोस्वामी

‘चकदाह एक्सप्रेस’ के नाम से मशहूर झूलन गोस्वामी के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा 355 विकेट लेने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। उनके नाम वनडे में सबसे ज्यादा मेडन ओवर डालने का रिकॉर्ड कायम है। झूलन को क्रिकेट में उनके शानदार योगदान के लिए 2010 में अर्जुन पुरस्कार और 2012 में पद्मश्री से नवाजा जा चुका है।

2. फुटबॉल:

(A) सुनील छेत्री

दिग्गज भारतीय फुटबॉलर सुनील छेत्री अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ियों की लिस्ट में पुर्तगाल के क्रिस्टियानो रोनाल्डो (140+) और अर्जेंटीना के लियोनेल मेसी (110+) के साथ टॉप-5 की लिस्ट में शामिल हैं। वह भारत के लिए सबसे ज्यादा गोल करने वाले खिलाड़ी हैं। छेत्री के नाम 157 मैचों में 95 गोल है।

(B) बाइचुंग भूटिया

भारतीय फुटबॉल के सबसे महान खिलाड़ियों में से एक बाइचुंग भूटिया के नाम 107 अंतर्राष्ट्रीय मैचों में 42 गोल है। वह 1999 में यूरोपीय क्लब (बरी एफसी, इंग्लैंड) के साथ अनुबंध करने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर बने थे।

(C) गुरप्रीत सिंह संधू

गोलकीपर गुरप्रीत सिंह संधू को भारतीय पुरुष फुटबॉल टीम के सबसे शानदार गोलकीपर माना जाता है। संधू यूईएफए (UEFA) प्रतियोगिता में खेलने वाले पहले भारतीय फुटबॉलर हैं।

(D) संदेश झिंगन

संदेश झिंगन को भारतीय फुटबॉल डिफेंस का दीवार कहा जाता है। मजबूत डिफेंस के लिए पहचाने जाने वाले झिंगन सेंटर-बैक से खेलते हैं।

(E) आईएम विजयन

80 से ज्यादा इंटरनेशनल मैच खेलने वाले आईएम विजयन को ‘भारतीय फुटबॉल का काला हिरण’ भी कहा जाता है। उन्हें उनकी गोल स्पीड और गोल करने की क्षमता के लिए जाने जाता था। वह भारतीय फुटबॉल टीम की कप्तानी भी कर चुके हैं।  1993, 1997 और 1999 में ‘प्लेयर ऑफ द ईयर’ का खिताब जीतने वाले विजयन को 2003 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था।

(F) सुब्रत पाल

भारतीय फुटबॉल टीम के पूर्व कप्तान सुब्रत पाल को उनकी शानदार गोलकीपिंग के लिए जाना जाता था और इसलिए उन्हें ‘स्पाइडर मैन’ भी कहा जाता था। उनके नाम पर सुब्रतो कप फुटबॉल टूर्नामेंट भी खेला जाता है।

3. हॉकी:

(A) मेजर ध्यानचंद

इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में जन्मे ध्यान सिंह चंद को हॉकी का जादूगर कहकर पुकारा जाता है। उन्हें इस खेल में बहुत महारत हासिल थी और वो गेंद को अपने नियंत्रण में रखने में इतने निपुण थे कि वो ‘हॉकी जादूगर’ और ‘द मैजिशियन’ जैसे नामों से प्रसिद्ध हो गए। उनके नाम ओलंपिक में कई गोल दर्ज है। उनके जन्म दिवस 29 अगस्त के दिन भारत में राष्ट्रीय खेल दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। 3 दिसंबर 1979 हॉकी के इस जादूगर का निधन हो गया।

(B) धनराज पिल्लै

धनराज पिल्लै ने 1989 से 2004 तक 15 वर्षों के दौरान 339 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 4 ओलंपिक और 4 विश्व कप में खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। साथ ही वह चार एशियाई खेलों में भी भारतीय टीम का हिस्सा रहे।

(C) मोहम्मद शाहिद

1979 में भारतीय हॉकी जूनियर टीम में डेब्यू करने वाले अपने समय के बेहतरीन हॉकी खिलाड़ी मोहम्मद शाहिद ने अपनी प्रतिभा के दम पर जल्द ही 1980 मास्को ओलंपिक में भारतीय सीनियर हॉकी टीम में जगह बना ली थी। उन्होंने तब ज़फर इकबाल के साथ जुगलबंदी बनाकर देश को हॉकी का आठवां स्वर्ण पदक दिलाया था। हालांकि उसके बाद से भारत में हॉकी में अब तक कोई ओलंपिक स्वर्ण पदक नहीं जीता है।

(D) पीआर श्रीजेश

भारतीय गोलकीपर पीआर श्रीजेश को हॉकी को टीम का सबसे बेस्ट गोलकीपर माना जाता है। वह 2011 एशियन चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के खिलाफ दो गोल सेव करके नेशनल हीरो बने। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और फिर चार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। पीआर श्रीजेश ने 2016 रियो ओलंपिक में टीम की कप्तानी भी संभाली और फिर 2020  टोक्यो और 2024 पेरिस ओलंपिक में कांस्य पदक कांस्य पदक विजेता टीम का हिस्सा बने।

(E) सविता पूनिया

गोलकीपर सविता पूनिया को भारतीय महिला हॉकी टीम की दीवार मानी जाती है। 18 साल की उम्र में डेब्यू करने वाली पूनिया 2016 में महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफ़ी में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। वह 2016 रियो ओलंपिक में भाग लेने वाली टीम का हिस्सा थीं, जिसने 36 साल बाद ओलंपिक के लिए क्वलीफाई किया था। उनकी कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम 2020 टोक्यो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रही थीं। सविता को 2018 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था।

(F) वंदना कटारिया

भारतीय महिला हॉकी टीम की फॉरवर्ड वंदना कटारिया के नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए सबसे ज्यादा गोल का रिकॉर्ड है। वह साथ ही सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली खिलाड़ियों में से एक हैं। दो बार ओलंपियन वंदना कटारिया ने 15 साल के अपने हॉकी करियर में 320 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 158 गोल दागे हैं।

4. निशानेबाजी:

(A) अभिनव बिंद्रा

दिग्गज निशानेबाज अभिनव बिंद्रा के नाम ओलंपिक के इतिहास में भारत के लिए पहला व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने का रिकॉर्ड है। बिंद्रा ने 2008 बीजिंग ओलंपिक में देश के लिए सोने पर अचूक निशाना लगाया था।

(B) मनु भाकर

मनु भाकर एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। मनु भाकर ने पेरिस ओलंपिक 2024 में 10 मीटर एयर पिस्टल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता और फिर इसी ओलंपिक में 10 मीटर एयर पिस्टल मिश्रित टीम स्पर्धा में एक और कांस्य पदक अपने नाम किया।

(C) गगन नारंग

चार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाले गगन नारंग के लिए सबसे खास लम्हा उस समय आया था, जब उन्होंने 2012 लंदन ओलंपिक में 10 मीटर एयर राइफल में कांस्य पदक जीता था। इसके दो साल बाद ही उन्होंने 2014 ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में एक रजत और एक कांस्य पदक के रूप में दो पदक जीते थे। 2016 रियो ओलंपिक के बाद गगन ने संन्यास ले लिया और ‘गन्स एंड ग्लोरी’ शूटिंग अकादमी की स्थापना की।

(D) राज्यवर्धन सिंह राठौड़

राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने 2004 एथेंस ओलंपिक में पुरुषों की डबल ट्रैप शूटिंग में रजत पदक जीता था और इसके साथ ही वह आजादी के बाद ओलंपिक में व्यक्तिगत रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय बने थे। उससे पहले उन्होंने 2002 मैनचेस्टर राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। राज्यवर्धन सिंह राठौड़ बाद में मोदी सरकार में देश के केंद्रीय खेल मंत्री भी बने।

(E) विजय कुमार

निशानेबाज विजय कुमार ने 2012 लंदन ओलंपिक में 25 मीटर रैपिड फायर पिस्टल में रजत पदक जीतकर देश को गौरवान्वित किया था।

(F) राही सरनोबत

महिला निशानेबाज राही सरनोबत को 15 मीटर पिस्टल शूटिंग की महारथी मानी जाती हैं। वह दो बार ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। साथ ही वह आईएसएसएफ विश्व कप स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय पिस्टल निशानेबाज और एशियाई खेलों में स्वर्ण जीतने वाली पहली भारतीय महिला निशानेबाज हैं।

5. बैडमिंटन:

(A) पीवी सिंधु

ओलंपिक विजेता पीवी सिंधु बैडमिंटन में दो ओलंपिक पदक विजेता जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2016 रियो ओलंपिक में रजत और 2020 टोक्यो ओलंपिक में कांस्य जीते थे। सिंधु के नाम वर्ल्ड चैंपियनशिप में पांच पदक है, जिसमें 2019 का स्वर्ण पदक भी शामिल है।

(B) साइना नेहवाल

2012 लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता साइना नेहवाल ने अपने 12 साल के बैडमिंटन करियर के दौरान 24 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय खिताब जीते। उनकी सबसे बड़ी जीत 2012 में लंदन ओलंपिक में आई थी जब उन्होंने कांस्य पदक जीते थे।

(C) लक्ष्य सेन

उत्तराखंड के अल्मोड़ा में जन्मे लक्ष्य सेन ने बहुत कम उम्र में ही बैडमिंटन में अपना नाम कमाया है। अंतर्राष्ट्रीय सर्किट पर कई बड़े उलटफेर कर चुके लक्ष्य सेन में 2024 पेरिस ओलंपिक में उस समय इतिहास रच दिया था जब वह पुरुष एकल स्पर्धा के सेमीफाइनल में पहुंचने वाले पहले भारतीय पुरुष शटलर बने। इसके अलावा उन्होंने 2018 यूथ ओलंपिक में रजत पदक और 2019 डच ओपन में पहला BWF वर्ल्ड टूर का खिताब भी जीता।

(D) किदांबी श्रीकांत

पूर्व वर्ल्ड नंबर-1 खिलाड़ी किदांबी श्रीकांत 2021 बैडमिंटन विश्व चैंपियनशिप के पुरुष एकल के फाइनल में पहुंचने वाले और BWF टूर में सुपर सीरीज प्रीमियर इवेंट में पुरुषों का खिताब जीतने वाले एकमात्र भारतीय खिलाड़ी हैं। इसके अलावा उन्होंने 2018 कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक (टीम इवेंट) और रजत पदक (पुरुष एकल) जीता था। वह 2017 में चार सुपर सीरीज़ खिताब जीतने वाले पहले भारतीय पुरुष खिलाड़ी भी रह चुके हैं।  किदांबी श्रीकांत ने 2018 में दुनिया के नंबर-1 टेनिस खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया था।

(E) एचएस प्रणय

भारतीय बैडमिंटन स्टार एचएस प्रणय के नाम कई जीत दर्ज है। उन्होंने 2023 में कोपेनहेगन में आयोजित बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था। उसके एक साल पहले ही उन्होंने 2022 थॉमस कप में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था। एचएस प्रणय ने साथ ही 2022 एशियाई खेलों में पुरुष एकल में कांस्य पदक जीता, जोकि 41 साल बाद किसी भारतीय का कोई एकल पदक था।

(F) सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी

सात्विकसाईराज रंकीरेड्डी और चिराग शेट्टी की युगल जोड़ी वर्ल्ड नंबर-1 बनने वाली भारत की पहली जोड़ी हैं। इस जोड़ी ने बीडब्ल्यूएफ विश्व चैंपियनशिप में दो कांस्य पदक जीते, साथ ही एशियाई खेल, एशियाई चैंपियनशिप और राष्ट्रमंडल खेल में स्वर्ण पदक भी अपने नाम किए। रेड्डी और शेट्टी विश्व रैंकिंग में नंबर 1 पर पहुंचने और वर्ल्ड टूर सुपर 1000 जीतने वाली एकमात्र भारतीय युगल जोड़ी हैं।

6. एथलेटिक्स:

(A) नीरज चोपड़ा

भारतीय भाला फेंक स्टार नीरज चोपड़ा ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीता। इसके साथ ही वह 2008 बीजिंग ओलंपिक में निशानेबाज अभिनव बिंद्रा के 10 मीटर एयर राइफल में ऐतिहासिक प्रदर्शन के बाद किसी व्यक्तिगत ओलंपिक में स्वर्ण पदक जीतने वाले दूसरे भारतीय बने। नीरज ने इसके बाद 2024 पेरिस ओलंपिक में भी भाला फेंक स्पर्धा में रजत पदक अपने नाम किया।

(B) मिल्खा सिंह

‘फ्लाइंग सिख’ के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह ने तीन ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इसके अलावा उन्होंने 1958 के राष्ट्रमंडल खेलों (400 मीटर) में स्वर्ण पदक, 1958 के एशियाई खेलों (200 मीटर और 400 मीटर) में स्वर्ण पदक और 1962 के एशियाई खेलों में एक और स्वर्ण पदक जीते। उन्हें 1958 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया। फरहान अख्तर की फिल्म ‘भाग मिल्खा भाग’ में उनके जीवन को दर्शाया गया है, जोकि भारत की सबसे प्रेरणादायक खेल कहानियों में से एक है।

(C) पीटी.उषा

‘उड़नपरी’ के नाम से मशहूर पीटी उषा ने 1984 के लॉस एंजिल्स ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया था, लेकिन वो करीबी अंतर से पदक जीतने से चूक गईं थीं। उषा ने अपने शानदार करियर में 30 से अधिक अंतरराष्ट्रीय सम्मान और 100 से अधिक पदक अर्जित किए।

(D) अंजू बॉबी जॉर्ज

भारत की पूर्व लंबी कूद की एथलीट अंजू बॉबी जॉर्ज के नाम कई रिकॉर्ड दर्ज है। वह वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली एकमात्र भारतीय महिला हैं। उन्होंने 2003 में पेरिस में आयोजित विश्व चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता था, जोकि वैश्विक प्रतियोगिता में भारत का पहला पदक था। अंजू बॉबी जॉर्ज का हालांकि बेस्ट प्रदर्शन 2004 एथेंस ओलंपिक में आया था, जहां उन्होंने महिलाओं की लंबी कूद में 6.83 मीटर की दूरी के साथ पांचवें स्थान हासिल किया था। यह दूरी अभी भी एक नेशनल रिकॉर्ड के रूप में कायम है।  अंजू बॉबी जॉर्ज हाल के समय में भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (AFI) की वाइस-प्रेसिडेंट है और यह संघ के इतिहास में किसी महिला का सर्वोच्च पद है।

(E) तजिंदरपाल सिंह तूर

शॉट पुटर भारतीय एथलीट तजिंदरपाल सिंह तूर के नाम भी ट्रैक एंड फील्ड पर दबदबा रहा है। वह दो बार के एशियाई स्वर्ण पदक विजेता और एशियाई रिकॉर्ड धारक हैं। तूर का पहला बड़ा अंतरराष्ट्रीय पदक 2018 जकार्ता एशियाई खेलों में आया था, जहां उन्होंने 20.75 मीटर थ्रो के साथ एक नया राष्ट्रीय और एशियाई खेलों का रिकॉर्ड बनाया और स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने इसके चार साल बाद हांगझोऊ एशियाई खेलों में अपना टाइटल डिफेंड किया था। उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक में भी भाग लिया।

(F) अविनाश साबले

अविनाश साबले को 3000 मीटर स्टीपलचेज का सबसे शानदार एथलीट माना जाता है। उन्होंने साल 2022 में एशियाई खेलों स्वर्ण पदक हासिल किया था। साबले कई बार अपना ही रिकॉर्ड तोड़ चुके हैं। उन्होंने 2024 पेरिस डायमंड लीग में पुरुषों की 3000 मीटर स्टीपलचेज स्पर्धा में अपना ही राष्ट्रीय रिकॉर्ड तोड़ा था, जब उन्होंने 8:09.91 के समय के साथ फिनिश लाइन पार की और राष्ट्रीय रिकॉर्ड एक सेकेंड से भी अधिक समय से बेहतर हो गया। वह 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में देश को रजत पदक दिला चुके हैं।

7. कुश्ती:

(A) सुशील कुमार

पहलवान सुशील कुमार के नाम ओलंपिक में दो पदक जीतने का रिकॉर्ड है। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में कांस्य पदक और 2012 लंदन ओलंपिक में रजत पदक जीता था। साथ ही वह विश्व चैंपियनशिप का खिताब जीतने वाले पहले भारतीय हैं।

(B) साक्षी मलिक

साक्षी ने 12 साल की उम्र में ही दादा से प्रेरणा लेकर छोटू राम स्टेडियम में मैट पर ताल ठोकनी शुरू कर दी थी। वह ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान भी हैं। साक्षी ने 2016 रियो ओलंपिक में देश को कांस्य पदक दिलाया था। रियो के अलावा साक्षी ने 2022 कॉमनवेल्थ गेम्स में भी गोल्ड मेडल जीता था। उन्हें 2016 में मेजर ध्यान चंद खेल रत्न अवॉर्ड और 2017 में पद्मश्री अवॉर्ड मिल चुका है।

(C) रवि कुमार दहिया

रवि कुमार दहिया, ओलंपिक में पदक जीतने वाले छठे भारतीय पहलवान बन चुके हैं। उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीता था। इसके साथ ही वह सुशील कुमार के बाद रजत पदक जीतने वाले दूसरे पहलवान बने थे। दहिया ने इससे पहले, साल 2020 में एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर 2021 और 2022 में अपने खिताब का बचाव भी किया था। उनके नाम कॉमनवेल्थ गेम्स 2022 में स्वर्ण पदक दर्ज है।

(D) बजरंग पूनिया

भारतीय पहलवान बजरंग पुनिया किसी भी वर्ग में वर्ल्ड नंबर-1 पहलवान बनने वाले पहले भारतीय हैं। साथ ही वह तीन विश्व चैंपियनशिप पदक जीतने वाले भी पहले भारतीय पहलवान हैं। 2019 वर्ल्ड चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीतने के बाद उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक के लिए कोटा हासिल किया था। उसी साल उन्हें भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान- मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार (पूर्व में राजीव गांधी खेल रत्न) दिया गया। टोक्यो ओलंपिक में हालांकि बजरंग दो राउंड से आगे नहीं बढ़ पाए।

(E) अमन सहरावत

अमन सहरावत 2024 पेरिस ओलंपिक में देश को कांस्य पदक दिला चुके हैं। इस समय वह प्रो कुश्ती लीग (PWL) 2026 में सबसे महंगे खिलाड़ियों में से एक हैं।

(F) अंतिम पंघाल

हरियाणा के हिसार से ताल्लुक रखने वाली भारत की युवा महिला पहलवान अंतिम पंघाल अपने अब तक के छोटे से करियर में दो बार अंडर-20 विश्व चैंपियन रह चुकी हैं। इसके अलावा उन्होंने एशियाई खेलों और सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में भी पदक जीते हैं। अंतिम पंघाल ने 53 वर्ग में 2024 पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

8. मुक्केबाजी:

(A) विजेंदर सिंह

विजेंदर सिंह ओलंपिक में पदक जीतने वाले पहले भारतीय मुक्केबाज हैं। उन्होंने 2008 बीजिंग ओलंपिक में देश के लिए कांस्य पदक जीता था। उन्होंने बाद में पेशेवर मुक्केबाजी का रुख किया, जहां अब तक उनका रिकॉर्ड 13-1 का है। खेल के अलावा वह राजनीति में भी सक्रिय हैं और भारतीय जनता पार्टी से जुड़े हुए हैं।

(B) मैरी कॉम  

छह बार की वर्ल्ड चैंपियन और भारत की दिग्गज महिला मुक्केबाज मंगते चुंगनेइजांग मैरी कॉम को ‘मैरी कॉम’ के नाम से जाना जाता है। उन्होंने 2012 के लंदन ओलंपिक में भारत के लिए कांस्य पदक जीता था। मैरी कॉम के बाद लवलीना बोरगोहेन भी ओलंपिक में पदक जीत चुकी हैं।

(C) लवलीना बोरगोहेन

असम के गोलाघाट जिले के बारोमुखिया गांव से आने वाली लवलीना बोरगोहेन किसी परिचय की मोहताज नहीं है। लवलीना ने 2017 एशियाई मुक्केबाजी चैंपियनशिप में कांस्य पदक के रूप में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय पदक जीता। इसके बाद उन्होंने रूस के उलान-उदे में 2019 विश्व चैंपियनशिप में एक और कांस्य पदक हासिल किया। इन दो पदकों के बाद अब बारी थी, टोक्यो 2020 में तिरंगा फहराने की। लवलीना ने इस मौके को पूरी तरह से भुनाते हुए महिलाओं की 69 किग्रा में कांस्य पदक अपने नाम किया। इसके अलावा उन्होंने 2023 में विश्व मुक्केबाजी चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीता। लवलीना बोरगोहेन, एमसी मैरी कॉम और विजेंदर सिंह के बाद ओलंपिक में पदक जीतने वाली तीसरी भारतीय मुक्केबाज हैं।

(D) लैशराम सरिता देवी

लैशराम सरिता देवी ने अपने करियर में चार बार एशियाई चैंपियनशिप का खिताब जीता। इसके अलावा उन्होंने 2014 में ग्लासगो, स्कॉटलैंड में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक अपने नाम किया। साल 2009 में उन्हें अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया था।

(E) निखत जरीन

भारतीय महिला मुक्केबाज निखत जरीन ने अपने करियर में अब तक दो बार वर्ल्ड चैंपियनशिप का खिताब जीता है। इसके अलावा वह 2024 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

(F) विकास कृष्ण यादव

विकास कृष्ण यादव ने अपने करियर में तीन ओलंपिक (2012, 2016, 2020) में भारत का प्रतिनिधित्व किया है। हालांकि वह अब तक एक बार भी पदक नहीं जीत पाए हैं।

9. टेनिस:

(A) लिएंडर पेस

दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस ने 1996 अटलांटा ओलंपिक में देश के लिए कांस्य पदक जीता था। उससे पहले वह 1992 के बार्सिलोना ओलंपिक में पदक के काफी करीब जाकर इससे चूक गए थे।

(B) सानिया मिर्जा

भारत की दिग्गज महिला टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्जा ने अपने करियर में कुल छह ग्रैंड स्लैम खिताब जीते हैं। इनमें तीन महिला डबल्स और तीन मिक्स डबल्स खिताब शामिल हैं। इसके अलावा वह चार ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं।

(C) महेश भूपति

महेश भूपति को ग्रैंड स्लैम जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी माने जाते हैं। उन्होंने साल 1997 में जापान के रिका हिराकी के साथ मिलकर फ्रेंच ओपन मिक्स्ड युगल का खिताब जीता था। भूपति ने बाद में हमवतन लिएंडर पेस के साथ मिलकर जोड़ी बनाई और कई खिताब जीते।

(D) रोहन बोपन्ना

भारतीय टेनिस स्टार रोहन बोपन्ना ने करीब दो दशक से भी अधिक समय तक के अपने करियर में दो ग्रैंड स्लैम खिताब और छह एटीपी मास्टर्स 1000 खिताब जीते। वह युगल में दुनिया के नंबर 1 खिलाड़ी भी रह चुके हैं। उनकी जीत में प्रतिष्ठित ऑस्ट्रेलियन ओपन युगल खिताब भी शामिल है।

(E) विजय अमृतराज

भारत के दिग्गज टेनिस खिलाड़ियों में से एक विजय अमृतराज ने अपने करियर में 15 एकल और 13 युगल खिताब जीते। उनकी कप्तानी में ही भारतीय डेविस कप टीम 1974 और 1987 के फाइनल में पहुंची थी। विजय अमृतराज को टेनिस में उनके अमूल्य योगदान के लिए साल 2026 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया है। उन्होंने 1970 और 1980 के दशक में अंतरराष्ट्रीय टेनिस में भारत को एक अलग पहचान दी थी।

(F) सुमित नागल

हरियाणा के झज्जर जिले के रहने वाले युवा टेनिस खिलाड़ी सुमित नागल पिछले कुछ समय से देश के लिए एकल वर्ग में लगातार अपनी चुनौती पेश कर रहे हैं। वह अब तक दो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। साल 2015 में उन्होंने विंबलडन में वियतनाम के ली होआंग नाम के साथ मिलकर लड़कों का युगल खिताब जीता।

10. भारोत्तोलन:

(A) कर्णम मल्लेश्वरी

साधारण परिवार से आने के बाद भी कर्णम मल्लेश्वरी ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला भारोत्तोलन खिलाड़ी बनीं। वेटलिफ्टर मल्लेश्वरी ने 19 सितंबर 2000 को सिडनी ओलंपिक में वेटलिफ्टिंग में 54 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक जीतकर इतिहास रचा था।

(B) मीराबाई चानू

मीराबाई चानू ने पिछले एक दशक से अपनी सनसनी प्रदर्शन से भारतीय वेटलिफ्टिंग को नई ऊंचाइयां दी है। 2016 रियो ओलंपिक की नाकामी को पीछे छोड़ते हुए चानू ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में रजत पदक जीतकर इतिहास रच दिया।

(C) जेरेमी लालरिननुंगा

जेरेमी लालरिनुंगा ने 2022 बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक जीता था। इससे पहले उन्होंने 2018 यूथ ओलंपिक में भी स्वर्ण पदक हासिल किया था। लालरिननुंगा का वह पदक राष्ट्रमंडल खेलों 2022 में देश का पांचवां पदक और आयोजन में उनका दूसरा स्वर्ण पदक था।

(D) कुंजारानी देवी

कुंजारानी देवी वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय हैं। उन्होंने साल 1989 में मैनचेस्टर में 44 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीतकर यह उपलब्धि हासिल की थी। कुंजारानी देवी ने अपने करियर में वर्ल्ड वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में कुल सात पदक जीते, जोकि किसी भारतीय द्वारा प्रतियोगिता में जीते गए सबसे अधिक पदक हैं।

(E) सतीश शिवलिंगम

सतीश शिवलिंगम ने 2014 और 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के लिए वेटलिफ्टिंग में लगातार दो स्वर्ण पदक जीते हैं। अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित यह भारोत्तोलक 2016 रियो ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

(F) रवि कुमार कातुलु

ओडिशा के रवि कुमार कातुलु ने 2010 के राष्ट्रमंडल खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्वर्ण पदक जीता। इसके बाद उन्होंने 2014 राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक अपने नाम किया। वह 2012 लंदन ओलंपिक में भी देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं।

11. टेबल टेनिस:

(A) मनिका बत्रा

मनिका बत्रा ओलंपिक में एकल राउंड ऑफ 32 में जगह बनाने वाली भारत की पहली महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक में यह उपलब्धि हासिल की थी। मनिका ने इससे पहले 2016 रियो ओलंपिक में डेब्यू किया था। उनका बेस्ट प्रदर्शन 2018 गोल्ड कोस्ट कॉमनवेल्थ गेम्स में आया था जब उन्होंने दो स्वर्ण सहित चार पदक जीते थे।

(B) अचंता शरथ कमल

अचंता शरथ कमल को भारत के सबसे अनुभवी और महानतम टेबल टेनिस खिलाड़ियों में से एक माना जाता है। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारत को कई खिताब दिलाए हैं। अचंता शरथ कमल ने अपने लंबे करियर में 2004 से लेकर 2024 तक 5 ओलंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने अपने करियर में राष्ट्रमंडल खेलों में सात स्वर्ण पदक जीते, जबकि एशियाई खेलों में दो कांस्य हासिल किए। उनके नाम एशियाई टेबल टेनिस चैम्पियनशिप में भी चार कांस्य पदक है। वह राष्ट्रमंडल खेलों में एकल स्वर्ण पदक जीतने वाले पहले भारतीय हैं।

(C) जी.साथियान

स्टार भारतीय टेबल टेनिस खिलाड़ी जी साथियान वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-25 में पहुंचने वाले पहले भारतीय हैं। उन्होंने 2018 राष्ट्रमंडल खेलों में 3 पदक जीते थे। इनमें स्वर्ण, रजत, कांस्य शामिल हैं। साथियान ने इसके अलावा 2022 में कॉमनवेल्थ गेम्स में भी कांस्य पदक जीता था।

(D) हरमीत देसाई

गुजरात के सूरत जिले के रहने वाले हरमीत देसाई ने 2018 गोल्ड कोस्ट राष्ट्रमंडल खेलों की टीम स्पर्धा में अचंत शरत कमल, एंथोनी अमलराज, साथियान गणानाशेखरन तथा सनिल शेट्टी के साथ स्वर्ण तथा सनिल शेट्टी के साथ पुरुष युगल स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था।

(E) श्रीजा अकुला

2024 पेरिस ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने वाली श्रीजा अकुला वर्ल्ड रैंकिंग में टॉप-25 में जगह बनाने वाली पहली भारतीय महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी हैं। उन्होंने अगस्त 2024 में यह उपलब्धि हासिल की थी। साथ ही वह ओलंपिक के राउंड ऑफ 16 में पहुंचने वाली मनिका बत्रा के बाद देश की दूसरी महिला टेबल टेनिस खिलाड़ी है।

(F) मानव ठक्कर

युवा ओलंपिक और ग्रीष्मकालीन ओलंपिक में भाग ले चुके मानव ठक्कर देश के शीर्ष टेबल टेनिस खिलाड़ियों में से एक हैं।

12. शतरंज

(A) विश्वनाथन आनंद

सबसे महानतम शतरंज खिलाड़ियों में से एक विश्वनाथन आनंद भारत के पहले ग्रैंडमास्टर और पांच बार के विश्व चैंपियन माने जाते हैं। वह 21 महीनों तक दुनिया के नंबर-1 शतरंज खिलाड़ी रहे, जोकि छठा सबसे लंबा समय था। विश्वनाथन आनंद को 6 बार प्रतिष्ठित ‘शतरंज ऑस्कर’ मिल चुका है।

(B) डी. गुकेश

भारतीय ग्रैंडमास्टर डी गुकेश को विश्व शतरंज चैंपियन मैग्नस कार्लसन को हराने वाले सबसे कम उम्र के खिलाड़ी बनने का गौरव प्राप्त है। उन्होंने अक्टूबर 2022 में एमचेस रैपिड टूर्नामेंट के दौरान यह कारनामा किया था। इसके अलावा वह 2750 की रेटिंग तक पहुंचने वाले अब तक के सबसे कम उम्र के खिलाड़ी हैं। उन्होंने इस मामले में कार्लसन का रिकॉर्ड तोड़ा था। इसके साथ ही डी. गुकेश ने विश्वनाथन आनंद को पछाड़कर भारत में शीर्ष स्थान हासिल किया है और वह सबसे युवा ग्रैंडमास्टर में से एक हैं।

(C) कोनेरू हम्पी

कोनेरू हम्पी भारत की नंबर 1 महिला खिलाड़ी और 2019 की वर्ल्ड रैपिड चैंपियन हैं। वह लगातार 2600+ रेटिंग के साथ विश्व की सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक हैं।

(D) हरिका द्रोणावल्ली

भारत की सबसे अनुभवी अनुभवी ग्रैंड मास्टर में से एक हरिका द्रोणावल्ली ओलंपियाड में पदक जीतने वाली भारतीय टीम का हिस्सा रह चुकी हैं।

(E) आर. प्रज्ञानानंद

भारतीय शतरंज ग्रैंडमास्टर आर. प्रज्ञानानंद इतिहास के दूसरे सबसे कम उम्र के ग्रैंडमास्टर हैं। साथ ही वह विश्व चैंपियन मैग्नस कार्लसन को क्लासिक शतरंज में हराने वाले विश्वनाथन आनंद के बाद दूसरे भारतीय हैं।

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