भारत का राष्ट्रीय खेल हॉकी कई ओलंपिक में देश को स्वर्ण पदक दिला चुका है। भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने ओलंपिक के इतिहास में अब तक कुल 13 पदक जीते हैं। इनमें 8 स्वर्ण, एक रजत और चार कांस्य पदक है। ओलंपिक के इतिहास में भारत की पुरुष हॉकी टीम सबसे सफल टीम है, लेकिन भारतीय महिला हॉकी टीम का प्रदर्शन पुरुषों के मुकाबले थोड़ा निम्न स्तर का रहा है। भारत की महिला हॉकी टीम ने अब तक केवल दो बार ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। यहां तक पहुंचने में महिला हॉकी को कई साल और काफी संघर्ष करना पड़ा है।
भारत में महिला हॉकी की उदय
भारत में महिला हॉकी की शुरुआत आजादी के बाद से मानी जाती है। साल 1947 में अखिल भारतीय महिला हॉकी महासंघ की स्थापना हुई। 1950 के दशक से लेकर अब तक हॉकी टीम ने कई उतार चढ़ाव देखे हैं। भारतीय महिला हॉकी खिलाड़ियों को आर्थिक दिक्कतों के अलावा, सामाजिक बाधाएं और पुरुष खिलाड़ियों की तुलना में कम अवसरों जैसी कई समस्याओं का सामना करना पड़ा है। इन सब दिक्कतों के बावजूद टीम की खिलाड़ियों ने कड़ी मेहनत और इस खेल के प्रति लगाव के जरिये अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
साल 1974 में टीम ने विश्व कप में डेब्यू किया और शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया। भारतीय महिला हॉकी टीम की पहली बड़ी जीत साल 1982 में आई, जब टीम ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा। इसके बाद टीम ने 2002 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक और 2004 में एशिया कप जीतकर अपना वर्चस्व स्थापित किया।
उपलब्धियां
भारतीय महिला हॉकी टीम ने साल 1980 में पहली बार ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था। रूपा सैनी की कप्तानी में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए चौथा स्थान हासिल किया था। उसके बाद से टीम के प्रदर्शन में लगातार सुधार होता रहा। साल 2010 में दिल्ली राष्ट्रमंडल खेलों में टीम ने अपने घरेलू दर्शकों के सामने रजत पदक जीता। टीम ने 2016 रियो ओलंपिक के लिए क्वालीफाई करके 36 साल बाद किसी ओलंपिक का टिकट कटाया।
वहीं, 2018 एशियाई खेलों में भी टीम ने फाइनल तक का सफल तय किया, लेकिन यहां भी उसे फिर से रजत पदक से ही संतोष करना पड़ा। 2020 टोक्यो ओलंपिक भारतीय महिला हॉकी टीम के लिए सबसे शानदार रहा। टीम को हालांकि कांस्य पदक मुकाबले में ग्रेट ब्रिटेन से 3-4 से हार का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद देश को टीम के प्रदर्शन पर गर्व था क्योंकि यह पहला मौका था जब भारतीय महिला हॉकी टीम ओलंपिक में मेडल के लिए मैच खेलने उतरी थी।
प्रमुख खिलाड़ी
भारतीय महिला हॉकी टीम में कई ऐसे खिलाड़ी हुए हैं, जिन्होंने अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित कराया है। रानी रामपाल, वंदना कटारिया, गुरजीत कौर और दीप ग्रेस एक्का जैसे खिलाड़ियों ने शुरुआत में हर तरह की कठिनाइयों और संघर्ष को मात देकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपनी एक अलग पहचान बनाई है।
गोलकीपर सविता पूनिया को भारतीय महिला हॉकी टीम की दीवार मानी जाती है। 18 साल की उम्र में डेब्यू करने वाली पूनिया 2016 में महिला एशियाई चैंपियंस ट्रॉफ़ी में स्वर्ण पदक विजेता भारतीय टीम का हिस्सा बनीं। वह 2016 रियो ओलंपिक में भाग लेने वाली टीम का हिस्सा थीं, जिसने 36 साल बाद ओलंपिक के लिए क्वलीफाई किया था। उनकी कप्तानी में भारतीय महिला हॉकी टीम 2020 टोक्यो ओलंपिक में चौथे स्थान पर रही थीं। सविता को 2018 में अर्जुन पुरस्कार से नवाजा गया था।
भारतीय महिला हॉकी टीम की फॉरवर्ड वंदना कटारिया के नाम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत के लिए सबसे ज्यादा गोल का रिकॉर्ड है। वह साथ ही सबसे ज्यादा मैच खेलने वाली खिलाड़ियों में से एक हैं। दो बार ओलंपियन वंदना कटारिया ने 15 साल के अपने हॉकी करियर में 320 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 158 गोल दागे हैं।
















