भारतीय खेलों के इतिहास में कई दिग्गज महिला खिलाड़ियों ने खेल के मैदान में परचम लहराने के बाद राजनीति में भी अपनी धाक जमाई है। हमने कई बड़ी हस्तियों को चुनावों में बुरी तरह से शिकस्त मिली है, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने राजनीति में अपनी किस्मत आजमाई है। ऐसे में आइये, आपको भारत की उन दिग्गज महिला खिलाड़ियों से मिलवाते हैं, जिन्होंने खेल के मैदान में परचम लहराने के बाद राजनीति में भी अपनी धाक जमाई है।
पीटी उषा:
1984 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित करने वाली एथलीट पीटी उषा खेलों से संन्यास लेने के बाद राजनीति में भी अपनी किस्मत आजमा चुकी हैं। वह मौजूदा समय में राज्यसभा सदस्य हैं। जुलाई 2022 में, राष्ट्रपति ने पीटी उषा को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया था।
मैरी कॉम
छह बार की विश्व मुक्केबाजी चैंपियन और 2012 लंदन ओलंपिक की कांस्य पदक विजेता मैरी कॉम भी राज्यसभा सांसद के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं। भाजपा-नेतृत्व वाले एनडीए गठबंधन ने उन्हें 2016 में राज्यसभा भेजा। वह संसद में खेल और मणिपुर के मुद्दों को उठा चुकी गैं।
कृष्णा पूनिया
तीन बार ओलंपिक में भाग ले चुकीं कृष्णा पूनिया डिस्कस थ्रोअर में राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। खेलों से संन्यास लेने के बाद वह 2013 में कांग्रेस में शामिल हो गईं और राजस्थान के सादुलपुर निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतरीं। हालांकि वह चुनाव नहीं जीत पाईं और तीसरे स्थान पर रहीं। इसके बाद 2018 के राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें फिर से टिकट दिया। कृष्णा पूनिया ने इस बार भी सादुलपुर निर्वाचन क्षेत्र से ताल ठोका और शानदार जीत दर्ज करके वह पहली बार विधायक बनीं। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने उन्हें जयपुर ग्रामीण लोकसभा सीट से मैदान में उतारा, जहां उनका मुकाबला ओलंपिक पदक विजेता राज्यवर्धन सिंह राठौर से था, वो चुनाव हार गईं।
दीपा मलिक
पैरालंपिक खेलों में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी दीपा मलिक ने 2016 रियो ओलंपिक खेलों में शॉटपुट (गोला फेंक) की F53 श्रेणी में 4.61 मीटर के सर्वश्रेष्ठ थ्रो के साथ रजत पदक जीता था। वह साल 2019 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गईं। वह भारतीय पैरालंपिक समिति (PCI) की पहली महिला अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। इस समय वह वह एशियाई पैरालंपिक समिति के कार्यकारी बोर्ड में दक्षिण एशियाई क्षेत्र की प्रतिनिधि हैं।
विनेश फोगाट
विनेश फोगाट एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान हैं। इसके अलावा वह राष्ट्रमण्डल खेलों में तीन स्वर्ण पदक जीतने वाली फोगाट पहली भारतीय महिला पहलवान हैं। 2024 पेरिस ओलंपिक में दुर्भाग्यपूर्ण तरीके से अयोग्य घोषित होने और विनेश ने कुश्ती से संन्यास की घोषणा कर दी और राजनीति के अखाड़े में उतरीं। उसी साल उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की सदस्यता ग्रहण कर ली और 2024 में हरियाणा विधानसभा चुनाव में पार्टी ने उन्हें जुलाना निर्वाचन क्षेत्र से चुनावी मैदान में उतारा। विनेश ने चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के योगेश कुमार को 6,015 मतों के अंतर से हराकर 19 साल बाद जुलाना सीट पर कांग्रेस को जीत दिलाई।
बबीता फोगाट
बबीता फोगाट ने 2014 के राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक और 2010 और 2018 के राष्ट्रमंडल खेलों में रजत पदक जीते है। 2019 में कुश्ती से संन्यास लेने के बाद वह भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गई। भाजपा ने उन्हें 2019 के हरियाणा विधानसभा चुनाव में दादरी सीट से उम्मीदवार बनाया, लेकिन बबीता फोगाट को हार का सामना करना पड़ा।
रानी नाराह
असम महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान रानी नाराह ‘वीमेन क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ इंडिया‘ की अध्यक्ष भी रही हैं। उन्होंने वॉलीबॉल और वेटलिफ्टिंग में भी राज्य का प्रतिनिधित्व किया है। खेलों से संन्यास लेने के बाद रानी नाराह अब तक कुल चार बार संसद सदस्य रह चुकी हैं। 2012 से 2014 तक वह मनमोहन सिंह सरकार में केंद्रीय जनजातीय मामलों की राज्य मंत्री भी थीं।
श्रेयसी सिंह
पूर्व निशानेबाज श्रेयसी सिंह इस समय बिहार में नीतीश सरकार में खेल और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री हैं। श्रेयसी 2014 ग्लासगो राष्ट्रमण्डल खेलों में निशानेबाजी की डबल ट्रैप स्पर्धा में रजत और 2014 एशियाई खेलों में कांस्य पदक जीत चुकी हैं। साल 2020 में वह भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद उन्होंने जमुई विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीता। इसके बाद उन्होंने 2024 पेरिस ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।














