1. मिताली राज (Mithali Raj):
राजस्थान के जोधपुर में 3 दिसंबर 1982 को जन्मी मिताली की परवरिश तेलंगाना के सिकंदराबाद में हुई थी। उनके पिता दुरई राज भारतीय वायुसेना में अधिकारी थे। तमिल परिवार में जन्मी मिताली ने तीसरी कक्षा में ही भरतनाट्यम सीखना शुरू कर दिया था। शुरुआत में उन्हें क्रिकेट से ज्यादा लगाव नहीं था और उनकी चाहत एक डांसर बनने की थी। लेकिन सिकंदराबाद की जोंस क्रिकेट अकादमी में ज्योति प्रसाद और संपथ कुमार जैसे कोच की देखरेख में वह भारतीय महिला क्रिकेट टीम की एक बड़ी पहचान बन गईं।
पूर्व कप्तान मिताली राज के नाम सभी फॉर्मेट में सबसे ज्यादा रन बनाने का वर्ल्ड रिकॉर्ड है। मिताली ने अपने इंटरनेशनल करियर में कुल 10,868 रन बनाए है, जोकि किसी भी महिला खिलाड़ी के द्व्रारा बनाया गया सबसे ज्यादा रन है। इसके अलावा मिताली के नाम महिला अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज़्यादा 93 अर्धशतक जड़ने का भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है। मिताली की कप्तानी में भारतीय महिला टीम 2005 और 2017 के महिला वनडे विश्व कप के फाइनल में पहुंची थी।
मिताली ने इंटरनेशनल क्रिकेट में अपना डेब्यू 26 जून 1999 को आयरलैंड के खिलाफ वनडे मैच से की थी। उन्होंने इसके बाद 2002 में लखनऊ में इंग्लैंड के खिलाफ मैच से अपने टेस्ट करियर की शुरुआत की और फिर 2021 में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया। मिताली ने 12 टेस्ट 43.68 की औसत के साथ एक शतक और चार अर्धशतकों की मदद से 699 रन बनाए। उन्होंने 232 वनडे मैचों की 211 पारियों में 50.68 की औसत से 7 शतक और 64 अर्धशतक लगाते हुए 7805 रन बनाए। इसके अलावा उन्होंने 89 टी20 इंटरनेशनल मैचों की 84 पारियों में 37.52 की औसत से 17 अर्धशतकों की बदौलत 2364 रन बनाए।
क्रिकेट में असाधारण उपलब्धियों के लिए मिताली को 2003 में अर्जुन पुरस्कार, 2015 में पद्म श्री और 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार (पहले राजीव गांधी खेल रत्न) से सम्मानित किया जा चुका है।
2. झूलन गोस्वामी (Jhulan Goswami):
पश्चिम बंगाल के छोटे से नादिया जिले के एक कस्बे चकदाह से निकली झूलन गोस्वामी को क्रिकेट की बुलंदियों तक पहुंचने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ा था। उन्हें अपने शुरुआती दिनों में प्रैक्टिस के लिए हर रोज करीब तीन से पांच घंटे ट्रैवल करके चकदाह से कोलकाता जाना पड़ता था। ट्रैवलिंग के दौरान क्रिकेट खेलने को लेकर लोग उन्हें ताना मारा करते थे। शुरुआत में घरवाले भी झूलन के क्रिकेट खेलने से खुश नहीं थे और कुछ समय के बाद उनकी ट्रेनिंग भी बंद करवा दी थी। लेकिन सालों की मेहनत के बाद आखिरकार 2002 में उन्हें भारतीय टीम के लिए डेब्यू करने का मौका मिल गया।
झूलन गोस्वामी के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा 355 विकेट लेने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। उनके नाम वनडे में सबसे ज्यादा मेडन ओवर डालने का रिकॉर्ड कायम है। पूर्व तेज गेंदबाज झूलन ने अपने इंटरनेशनल करियर में 12 टेस्ट में 44, 204 वनडे में 255 और 68 टी20 इंटरनेशनल मैच में 56 विकेट चटकाए हैं। झूलन ने अपने इंटरनेशनल करियर की शुरुआत जनवरी 2002 में चेन्नई में इंग्लैंड के खिलाफ वनडे मैच से की थी। उन्होंने अक्तूबर 2021 में इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी। झूलन को क्रिकेट में उनके शानदार योगदान के लिए 2010 में अर्जुन पुरस्कार और 2012 में पद्म श्री से नवाजा जा चुका है।
3. डायना इडुल्जी (Diana Edulji):
26 जनवरी 1956 को मुंबई में जन्मीं डायना 70 के दशक की सबसे शानदार खिलाड़ियों में से एक रही हैं। एडुलजी परिवार में पहले से ही क्रिकेट खेलने का परंपरा थी। लेकिन डायना इडुल्जी बचपन में अपने कॉलोनी में टेनिस बॉल से खेलती थीं। बहुत कम लोगों को पता होगा कि वह जूनियर लेवल पर टेबल टेनिस और बास्केट बॉल भी खेल चुकी हैं।
भारतीय महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान डायना इडुल्जी को खिलाड़ी के साथ-साथ एक सफल प्रशाशक के रूप में भी जाना जाता है। नवंबर 1976 में इंटरनेशनल क्रिकेट में डेब्यू करने वाली डायना ने जुलाई 1993 में इंटरनेशनल क्रिकेट को अलविदा कह दिया। उन्होंने 20 टेस्ट की 30 पारियों में 404 रन और 34 वनडे मैचों की 30 पारियों में 211 रन बनाए। साथ ही टेस्ट में 63 और वनडे क्रिकेट में 46 विकेट भी झटके। उन्हें 1983 में खेलों के सबसे बड़े पुरस्कार अर्जुन पुरस्कार और 2002 में पद्म श् पुरस्कार मिल चुका है। वह भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) की प्रशासक पैनल में शामिल होने वाली पहली महिला भी हैं। वह ICC हॉल ऑफ फेम में शामिल हो चुकी हैं।
4. अंजुम चोपड़ा (Anjum Chopra):
20 मई 1977 को नई दिल्ली में जन्मीं अंजुम चोपड़ा ने मात्र नौ साल की उम्र में ही क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया था। अंजुम ने भारतीय टीम के लिए 1995 से लेकर 2012 तक 12 टेस्ट, 127 वनडे और 18 टी20 इंटरनेशनल मैच खेले और क्रमश: 548, 2856 और 241 रन बनाए। क्रिकेट को अलविदा कहने के बाद अंजुम चोपड़ा ने कमेंट्री में अपना करियर जारी रखा है। क्रिकेट में अनोखी उपलब्धियां हासिल करने के लिए अंजुम चोपड़ा को साल 2007 में अर्जुन पुरस्कार और 2014 में पद्म श्री पुरस्कार मिल चुका है।
5. नीतू डेविड (Neetu David):
उत्तर प्रदेश के कानपुर में जन्मीं दिग्गज लेफ्ट आर्म स्पिनर नीतू डेविड के नाम टेस्ट में किसी महिला द्वारा सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी का रिकॉर्ड अभी भी कायम है। उन्होंने भारत के लिए 10 टेस्ट और 97 वनडे मैचों में क्रमश: 41 और वनडे में 141 विकेट चटकाए। 1995 में डेब्यू करने वाली नीतू डेविड ने सितंबर 2008 में इंग्लैंड के खिलाफ अपना आखिरी इंटरनेशनल मैच खेला था। साल 2024 में उन्हें आईसीसी की हॉल ऑफ फेम में शामिल किया जा चुका है। मौजूदा समय में नीतू भारतीय महिला क्रिकेट टीम की चीफ सिलेक्टर हैं।
















