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भारतीय महिला क्रिकेट का इतिहास और उसके दिग्गज खिलाड़ी

भारतीय महिला क्रिकेट का इतिहास और उसके दिग्गज खिलाड़ी

भारत में क्रिकेट को धर्म और क्रिकेटरों को भगवान माना जाता है। लेकिन इसी देश में कुछ देवियां भी हुई है, जिन्होंने महिला क्रिकेट की नींव रखी। इस लेख में हम भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास के पन्नों को पलटेंगे और उन खिलाड़ियों का जिक्र करेंगे, जिन्होंने महिला क्रिकेट को एक नई पहचान दी। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में शतक बनाने वाली पहली भारतीय महिला क्रिकेटर शांता रंगास्वामी, 1986 में इंग्लैंड में खेले गए एक टेस्ट मैच की एक पारी में 190 रन बनाकर वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाली संध्या अग्रवाल हो या 1995-96 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच की एक पारी में 53 रन देकर 8 विकेट लेने वाली नीतू डेविड की सर्वश्रेष्ठ गेंदबाजी प्रदर्शन हो। इन सब उपलब्धियों ने भारत में महिला क्रिकेट को एक नई पहचान दी।

भारत में महिला क्रिकेट की शुरुआत 1970 के दशक से मानी जाती है। साल 1973 में बेगम हमीदा हबीबुल्ला की अगुवाई में लखनऊ में भारतीय महिला क्रिकेट संघ (WCAI) को पंजीकृत कराया गया, जिसे अंतर्राष्ट्रीय महिला क्रिकेट परिषद (IWCC) ने भी अपनी मान्यता दी। इसी साल पुणे में आयोजित पहली महिला अंतरराज्यीय राष्ट्रीय प्रतियोगिता में बॉम्बे, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश की तीन टीमों ने भाग लिया। बाद इसके अगले सीजन में इसमें भाग लेने वाली टीमों की संख्या बढ़कर 14 तक हो गई।

करीब पांच साल की मशक्कत के बाद साल 1975 में भारत में पहली बार द्विपक्षीय महिला क्रिकेट सीरीज खेली गई, जिसमें ऑस्ट्रेलिया की अंडर-25 टीम ने तीन मैचों की टेस्ट सीरीज के लिए भारत का दौरा किया। राजधानी दिल्ली, पुणे और कोलकाता में आयोजित तीन टेस्ट मैचों में भारत ने अलग-अलग कप्तान उतारा। ऑस्ट्रेलिया के बाद भारत ने न्यूजीलैंड, इंग्लैंड और वेस्टइंडीज की मेजबानी की।

पहला अंतरराष्ट्रीय मैच

भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने इसके बाद अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच 31 अक्टूबर 1976 को बैंगलोर में वेस्टइंडीज के खिलाफ टेस्ट मैच के रूप में खेला। दोनों टीमों के बीच छह मैचों की यह सीरीज 1-1 से ड्रॉ रही। उस समय महिला टेस्ट मैच तीन दिन का खेला जाता था। अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने के दो साल बाद भारतीय टीम ने अपना पहला वनडे मैच खेला। डायना एडुल्जी की कप्तानी में भारतीय टीम ने 1978 विश्व कप के दौरान अपना वनडे डेब्यू किया। चार टीमों के इस टूर्नामेंट में ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और इंग्लैंड अन्य तीन टीमें थीं। इसके बाद भारतीय टीम ने 1982, 1993 और 1997 में हुए विश्व कप में भाग लिया। 1997 में भारत ने विश्व कप की मेजबानी की और इसमें 11 टीमों ने भाग लिया। कोलकाता के ईडन गार्डन्स में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच हुए फाइनल को देखने करीब 80,000 दर्शक स्टेडियम पहुंचे|

1995 में जीती पहली वनडे सीरीज

क्रिकेट के मैदान पर कई हार, काफी संघर्ष और कड़ी मेहनत के बाद भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने 1995 में अपनी पहली वनडे सीरीज जीती जब उसने न्यूजीलैंड को मात दी। टीम को यहां तक पहुंचाने में शांता रंगास्वामी, डायना एडुल्जी, सुधा शाह और संध्या अग्रवाल जैसी खिलाड़ियों का अहम योगदान रहा। सरकार ने उनकी योगदान को मान्यता देते हुए इन चारों को प्रतिष्ठित अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया।

1970s-2000s के दशक के प्रमुख खिलाड़ी:

शांता रंगास्वामी: शांता रंगास्वामी अंतर्राष्ट्रीय शतक बनाने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी हैं। वह भारतीय क्रिकेट टीम की पहली कप्तान हैं। साथ ही वह टेस्ट सीरीज जीतने वाली भी पहली कप्तान हैं। बीसीसीआई से उन्हें लाइफ टाइम अचीवमेंट पुरस्कार भी मिल चुका है। उन्होंने अपने करियर में 16 टेस्ट खेले और इनमें से 12 मैचों में टीम की कप्तानी की। 1976 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

डायना एडुल्जी: भारतीय महिला क्रिकेट की एक दिग्गज खिलाड़ी और प्रशासक डायना एडुल्जी ने अपने करियर के दौरान 100 से ज्यादा अंतर्राष्ट्रीय मैच खेले और कई रिकॉर्ड बनाए। वह बीसीसीआई प्रशासन पैनल में नियुक्त होने वाली पहली महिला बनीं। इसके अलावा उन्होंने 1983 में अर्जुन पुरस्कार और 2002 में पद्मश्री पुरस्कार जीते। आईसीसी ने डायना एडुल्जी को आईसीसी हॉल फेम में भी शामिल किया।

नीतू डेविड: नीतू डेविड ने 1995-96 में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट मैच की एक पारी में 53 रन देकर 8 विकेट लेकर एक नया कीर्तिमान बनाया था, जोकि कई सालों तक कायम रहा। रेलवे की अच्छे बाएं हाथ की स्पिनरों में से एक थी। उन्होंने जून 2006 में अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास की घोषणा कर दी थी, लेकिन 2008 की शुरुआत में अपना फैसला बदल दिया और उसी साल मई में एशिया कप के लिए भारतीय टीम में उनका चयन हुआ।

2000 के बाद के प्रमुख खिलाड़ी:

मिताली राज: इंटरनेशनल करियर में 10 हजार से ज्यादा रन बनाने वाली मिताली राज की कप्तानी में भारत ने पहली बार 2005 का वनडे वर्ल्ड कप खेला था। मिताली ने 2017 में भी अपनी कप्तानी में टीम को फाइनल में पहुंचाया था। मिताली के नाम महिला अंतर्राष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे ज़्यादा 93 अर्धशतक जड़ने का भी वर्ल्ड रिकॉर्ड है। क्रिकेट में असाधारण उपलब्धियों के लिए मिताली को 2003 में अर्जुन पुरस्कार, 2015 में पद्म श्री और 2021 में मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार (पहले राजीव गांधी खेल रत्न) मिल चुका है।

झूलन गोस्वामी: ‘चकदाह एक्सप्रेस’ के नाम से मशहूर झूलन गोस्वामी के नाम इंटरनेशनल क्रिकेट में सबसे ज्यादा 355 विकेट लेने का वर्ल्ड रिकॉर्ड दर्ज है। उनके नाम वनडे में सबसे ज्यादा मेडन ओवर डालने का रिकॉर्ड कायम है। झूलन को क्रिकेट में उनके शानदार योगदान के लिए 2010 में अर्जुन पुरस्कार और 2012 में पद्मश्री से नवाजा जा चुका है।

हरमनप्रीत कौर: भारतीय महिला क्रिकेट के इतिहास में अब तक जो कोई ना कर पाया था, वो हरमनप्रीत कौर ने कर दिखाया जब उन्होंने भारत को पहली बार वनडे वर्ल्ड कप का चैंपियन बनाया। हरमनप्रीत कौर की कप्तानी में टीम इंडिया ने 2025 में मुंबई के वानखेड़े स्टेडियम में खेले गए फाइनल में दक्षिण अफ्रीका को हराकर पहली बार वनडे वर्ल्ड कप का खिताब जीता।

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