देश में महिला कोच खेल के मैदान में रूढ़ियों को तोड़कर अपनी काबिलियत साबित कर रही हैं। भारत में लगभग सभी खेलों में महिला कोचों का उदय भारतीय खेलों के इतिहास में एक क्रांति के तौर पर देखा जा रहा है। देश की प्रमुख महिला कोचों में प्रीतम सिवाच (हॉकी), सुमित्रा कलिंदी (फुटबॉल), और दीपा कर्माकर की कोच बिशेश्वर नंदी (जिमनास्टिक) प्रमुख हैं। ये कोच न केवल खिलाड़ियों को तैयार कर रही हैं, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर जीत भी दिला रही हैं। ये कोच खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के तरीके को नया आकार दे रहे हैं। भारतीय खेलों के इतिहास में टॉप महिला कोचों पर एक नजर-
1) अंजू जैन (क्रिकेट)
अंजू जैन 2018-2019 तक भारतीय महिला राष्ट्रीय क्रिकेट टीम की पूर्व मुख्य कोच रह चुकी हैं। उनके मार्गदर्शन में ही भारतीय महिला क्रिकेट टीम 2018 आईसीसी महिला टी20 विश्व कप के सेमीफाइनल तक पहुंची थी। पूर्व भारतीय विकेटकीपर बैटर अंजू जैन के पास 65 वनडे मैचों का अनुभव है। अपने छोटे से कार्यकाल के दौरान उन्होंने राष्ट्रीय टीम को कोचिंग देने वाली कुछ महिलाओं में से एक बनकर एक नई मिसाल कायम की।
2) संध्या गुरुंग (बॉक्सिंग)
संध्या गुरुंग को देश में प्रमुख महिला मुक्केबाजी कोचों में से एक माना जाता है। उन्होंने ना सिर्फ मुक्केबाजों को कोचिंग दी है बल्कि ओलंपिक स्तर की प्रतिभाओं को निखारने में भी सक्षम भूमिका निभाई है। संध्या जमीनी स्तर के कोचों के उच्च स्तर तक पहुंचने का प्रतीक भी हैं। वह लवलीना बोरगोहेन की उस समय कोच थी, जब इस मुक्केबाज ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में देश के लिए कांस्य पदक जीता था।
3) प्रीतम सिवाच (हॉकी)
प्रीतम सिवाच की कोचिंग में कई महिला खिलाड़ियों ने हॉकी में शानदार प्रदर्शन किया है। वह भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान भी रह चुकी हैं और वर्तमान में सिवाच स्पोर्ट्स फाउंडेशन में कोचिंग दे रही हैं। प्रीतम सिवाच ने अपने कोचिंग करियर में अब तक अकादमी के माध्यम से 20 से अधिक राष्ट्रीय स्तर की खिलाड़ी तैयार की हैं। वह जूनियर और सीनियर महिला हॉकी टीमों की खिलाड़ियों को कोचिंग देती हैं। उनके फाउंडेशन को हरियाणा की युवा लड़कियों में हॉकी के प्रति रुचि को पुनर्जीवित करने का श्रेय दिया जाता है।
4) सुनील डबास (कबड्डी)
भारतीय महिला कबड्डी टीम की कोच सुनील डबास की कोचिंग में टीम ने कई बुलंदियों को छुआ है। देश की सबसे सम्मानित कबड्डी कोचों में से एक सुनील डबास ने भारतीय महिला टीम को कई स्वर्ण पदक दिलाए हैं। उनकी कोचिंग में ही टीम ने 2010 एशियाई खेलों और 2012 विश्व कप सहित 7 अंतरराष्ट्रीय स्वर्ण पदक जीते। उन्हें 2012 में द्रोणाचार्य पुरस्कार और 2014 में भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।
5) मेमोल रॉकी (फुटबॉल)
मेमोल रॉकी, भारतीय महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की मुख्य कोच नियुक्त होने वाली पहली महिला हैं। उनके मार्गदर्शन में भारतीय टीम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई महत्वपूर्ण सफलता हासिल की हैं। वह वर्तमान में भारत की अंडर-20 महिला टीम की मुख्य कोच के रूप में कार्यरत हैं।
6) दीपाली देशपांडे (शूटिंग)
दीपाली देशपांडे को भारतीय निशानेबाजी में ‘जूनियर रिवोल्यूशन’ का जनक माना जाता है। वह भारतीय राइफल शूटिंग की प्रमुख कोच और पूर्व ओलंपियन हैं। कोचिंग के क्षेत्र में उनके शानदार योगदान के लिए उन्हें साल 2024 में द्रोणाचार्य पुरस्कार सम्मानित किया जा चुका है।
7) सुमा शिरूर (शूटिंग)
सुमा शिरूर ने अपने कोचिंग करियर में अब तक कई ऐसे एथलीटों को कोचिंग दी है, जिन्होंने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया है। एलावेनिल वलारिवन और अपूर्वी चंदेला जैसी महिला शूटर उन्हीं की छत्रछाया से निकली हैं। सुमा शिरूर के मार्गदर्शन में ही एलावेनिल ने 2019 में विश्व कप में स्वर्ण पदक जीता था। स्वयं एक पूर्व ओलंपियन होने के नाते, वह उच्च स्तरीय प्रदर्शन के दबाव को समझती हैं और मानसिक कंडीशनिंग को एक मुख्य तत्व के रूप में शामिल करती हैं।
8) कुंजारानी देवी (वेटलिफ्टर)
कुंजारानी देवी विश्व वेटलिफ्टिंग चैंपियनशिप में भारत के लिए पहली बार पोडियम स्थान पर पहुंचने के साथ ही सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। उन्होंने 2014 ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला भारोत्तोलन टीम के कोच के रूप में कार्य किया। उसके बाद उन्होंने 2020 टोक्यो ओलंपिक की रजत पदक विजेता मीराबाई चानू जैसी एथलीटों को उनके शुरुआती करियर में मार्गदर्शन और प्रशिक्षण देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। मौजूदा समय में वह केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) में कमांडेंट के पद पर कार्यरत हैं और बल की केंद्रीय खेल टीम के लिए नोडल अधिकारी के रूप में खेल प्रतिभाओं को तराश रही हैं।
















