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ओलंपिक में बेहद करीबी अंतर से पदक गंवाने वाले भारतीय खिलाड़ी

ओलंपिक में बेहद करीबी अंतर से पदक गंवाने वाले भारतीय खिलाड़ी

ओलंपिक इतिहास में कई भारतीय खिलाड़ियों ने करीबी अंतर से पदक गंवाए हैं। इन खिलाड़ियों ने भले ही पदक गंवा दिया हो, लेकिन अपने प्रदर्शन से देश का सिर गर्व से ऊंचा जरूर किया। भले ही इन खिलाड़ियों को पदक नहीं मिला, लेकिन वे हमेशा भारतीय खेलों के प्रेरणास्रोत बने रहेंगे। आज हम आपको उन खिलाड़ियों के बारे में बताते हैं, जो ओलंपिक में करीबी अंतर से पदक जीतने से चूक गए।

1. मिल्खा सिंह (1960 रोम ओलंपिक में 400 मीटर दौड़ में सिर्फ 0.1 सेकंड से कांस्य पदक से चूके)

फ्लाइंग सिख‘ के नाम से मशहूर मिल्खा सिंह को आजाद भारत का पहला स्पोर्ट्स स्टार माना जाता है। 1960 के रोम ओलंपिक में देश को उनसे काफी उम्मीदें थी। 400 मीटर दौड़ में उन्होंने धमाकेदार शुरुआत की और अपना पूरा दमखम लगा दिया। कांस्य पदक जीतने की दौड़ में वह बेहद करीब पहुंच गए थे, लेकिन फोटो फिनिश में वह अनलकी साबित हुए और उनके हाथ से पदक निकल गया। मिल्खा सिंह ने उस 400 मीटर के रेस को 45.73 सेकंड में फिनिश किया। उनका यह समय करीब 40 सालों तक राष्ट्रीय रिकॉर्ड के रूप में कायम रहा। उन्होंने रोम के अलावा 1956 मेलबर्न ओलंपिक और 1964 टोक्यो ओलंपिक में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया।

2. श्रीराम सिंह (1976 मॉन्ट्रियल ओलंपिक)

श्रीराम सिंह भी मिल्खा सिंह की तरह ही बेहतरीन एथलीट माना जाता था। हालांकि 1976 के मॉन्ट्रियल ओलंपिक में शानदार प्रदर्शन के बावजूद वह पदक जीतने से चूक गए। श्रीराम सिंह ने 800 मीटर दौड़ के फाइनल में पहुंचकर पदक की आस जगा दी थी। उन्होंने पहली ही रेस को 1:45.86 मिनट में पूरा करके अपना ही एशियाई रिकॉर्ड को तोड़ा। श्रीराम ने इसके बाद सेमीफाइनल में चौथे स्थान पर रहकर फाइनल के लिए क्वालीफाई किया। फाइनल में वह करीब 300 मीटर तक की रेस में सबसे आगे रहे, लेकिन फिर काफी पीछे हो गए और 1:45.77 मिनट समय के साथ उन्हें सातवें स्थान से संतोष करना पड़ा।

3. पीटी उषा (1984 लॉस एंजिलिस ओलंपिक)

मिल्खा सिंह और श्रीराम सिंह के पदक से चूकने के बाद देश की सारी अब उम्मीदें ‘उड़न परी‘ पीटी उषा पर थी। 1984 लॉस एंजिलिस ओलंपिक में पीटी उषा ने 400 मीटर की बाधा दौड़ के सेमीफाइनल में तूफानी प्रदर्शन करते हुए ना सिर्फ फाइनल में पहुंची बल्कि इतिहास भी रच दिया। वह ओलंपिक मुकाबले के फाइनल में पहुंचने वाली देश की पांचवीं भारतीय और पहली महिला बनी थी। हालांकि फाइनल में वह स्वर्ण नहीं जीत पाई, लेकिन कांस्य पदक मुकाबले में वह पदक के काफी करीब थी। हालांकि फोटो फिनिश के दौरान वह सेकंड के सौवें हिस्से से पदक पर कब्जा जमाने से चूक गई।

4. लिएंडर पेस (1992 बार्सिलोना ओलंपिक )

दिग्गज टेनिस खिलाड़ी लिएंडर पेस के पास 1992 बार्सिलोना ओलंपिक में पदक जीतने का सुनहरा मौका था। वह रमेश कृष्णन के साथ युगल स्पर्धा के मुकाबले में उतरे थे। कांस्य पदक जीतने के लिए पेस और उनके जोड़ीदार रमेश कृष्णन को सिर्फ सेमीफाइनल में पहुंचना था क्योंकि उस समय कांस्य पदक जीतने के लिए अंतिम-4 में हारे खिलाड़ियों के बीच मुकाबला नहीं होता था। हालांकि पेस और कृष्णन सेमीफाइनल में नहीं पहुंच सके और वे पदक से चूक गए। पेस ने हालांकि 1996 अटलांटा ओलंपिक में कांस्य पदक जीतकर अपनी पिछली निराशा को दूर कर दिया।

5. जयदीप करमाकर (2012 लंदन ओलंपिक)

2012 के लंदन ओलंपिक में भारतीय निशानेबाजों का प्रदर्शन काफी शानदार रहा था। लंदन में भारत को एक रजत और कांस्य पदक मिल चुका था और अब जयदीप करमाकर के रूप में तीसरे पदक की उम्मीद जाग उठी थी। जयदीप ने 50 मीटर राइफल प्रोन इवेंट में क्वालीफिकेशन राउंड ने 595 अंक हासिल करने के बाद फाइनल में 104.1 का स्कोर बनाया जिससे उनका कुल स्कोर 699.1 रहा। हालांकि इसके बावजूद वह तीसरे स्थान पर रहे और मामूली अंतर से पदक से चूक गए। जयदीप करमाकर ने आखिरी बार 2014 में भारत का प्रतिनिधित्व किया था।

6. दीपा करमाकर (2016 रियो ओलंपिक)

2016 रियो ओलंपिक में दीपा करमाकर और देश के लिए बेहद खास था क्योंकि 52 साल बाद कोई खिलाड़ी जिम्नास्टिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने के लिए उतरा था। दीपा में जिम्नास्टिक के वॉल्ट फाइनल में पहुंचकर देश के लिए पदक की आस जगा दी थी। दीपा ने फाइनल में पहुंचकर इतिहास रच दिया था। फाइनल में उन्होंने कुल 15.066 अंक हासिल किए, लेकिन इसके बाद भी वो चौथे स्थान पर ही रह पाईं और मात्र 0.150 अंक के अंतर से पदक जीतने से चूक गई। दीपा 2016 रियो ओलंपिक में भले पदक जीतने से चूक गईं हो, लेकिन उसके बाद से उन्होंने जिम्नास्टिक में देश के लिए कई पदक जीते हैं। वह पद्मश्री और मेजर ध्यानचंद खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित हो चुकी हैं।

7. अदिति अशोक (2020 टोक्यो ओलंपिक)

रियो की निराशाजनक प्रदर्शन को पीछे छोड़ते हुए भारत की यंग महिला गोल्फर अदिति अशोक ने 2020 टोक्यो ओलंपिक में अपने प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित करने की पूरी कोशिश की। टोक्यो में उतरते ही वह ओलंपिक में भाग लेने वाली भारतीय महिला गोल्फर बनीं। वह आखिरी दौड़ तक पदक की रेस में बनी हुई थी, लेकिन सिर्फ दो शॉट से पदक से चूक गईं और उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा। अदिती भले ही ओलंपिक में पदक जीतने से चूक गई, लेकिन उन्होंने भारत में गोल्फ का स्तर ऊंचा उठा दिया। ओलंपिक के बाद अदिति के प्रदर्शन में काफी सुधार आया। उसके बाद उन्होंने एशियन गेम्स 2023 में रजत पदक जीते और फिर लेडीज यूरोपियन टूर का खिताब भी अपने नाम किया।

8. अर्जुन बबूता (2024 पेरिस ओलंपिक)

2024 पेरिस ओलंपिक में भारतीय निशानेबाजों ने दमदार प्रदर्शन किया। मनु भाकर ने तो एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतकर एक नया इतिहास रचा। इस ओलंपिक में भारत के पदकों की संख्या में और इजाफा हो सकता था, लेकिन अर्जुन बबूता पुरुषों की 10 मीटर एयर राइफल फाइनल में पदक के काफी करीब आकर चूक गए। अर्जुन ने कुल 208.4 का स्कोर किया,जोकि पदक जीतने के लिए नाकाफी थे और वो पदक पर निशाना लगाने से चूक गए। वह सिर्फ 1.4 अंक पीछे रह गए और उन्हें चौथे स्थान से संतोष करना पड़ा।

9. मनु भाकर (2024 पेरिस ओलंपिक)

महिला निशानेबाज मनु भाकर ने 2024 पेरिस ओलंपिक में एक नहीं बल्कि दो पदक जीते। इसके साथ ही वह आजादी के बाद एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय बनीं। मनु के पास 2024 पेरिस ओलंपिक में पदकों की हैट्रिक लगाने का मौका था, लेकिन वह इसमें सफल नहीं हो पाई। बेहद कम उम्र में निशानेबाजी में नई बुलंदियों को छूने वाली मनु ने 10 मीटर एयर पिस्टल और मिश्रित टीम में कांस्य पदक जीते। इसके बाद वह महिलाओं की 25 मीटर पिस्टल व्यक्तिगत स्पर्धा में उतरीं। यहां भी उनका प्रदर्शन काफी शानदार रहा, लेकिन आखिरी मौके पर आकर वो 0.1 अंक से भी कम से पदक जीतने से चूक गईं। एक ही ओलंपिक में दो पदक जीतने वाली भाकर को 2024 में भारत का सर्वोच्च खेल सम्मान- मेजर ध्यानचंद खेल रत्न अवॉर्ड से नवाजा गया।

10. भारतीय महिला हॉकी टीम (2020 टोक्यो ओलंपिक)

2020 टोक्यो ओलंपिक में भारतीय पुरुष हॉकी टीम ने कांस्य पदक जीतकर मॉस्को के बाद पहली बार मैदान पर तिरंगा लहराया। लेकिन रानी रामपाल की कप्तानी वाली महिला हॉकी टीम प्लेऑफ के मुकाबले में बढ़त बनाने के बावजूद इंग्लैंड के खिलाफ 3-4 के अंतर से हार गई। चौथे स्थान पर रहने के बाद भी महिला टीम का यह अब तक का सबसे बेस्ट प्रदर्शन माना जाता है।

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